पंचकूला। भंडारी अदबी ट्रस्ट और सप्त ससंधु फाउंडेशन की ओर से जिमखाना क्लब सेक्टर 6 पंचकुला के सभागार में शहीदों को श्रद्धासुमन विषय पर त्रिभाषीय कवि दरबार का आयोिजत किया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. कुलदीप चंद अग्निहोत्री, कार्यकारी उपाध्यक्ष, हरियाणा साहित्य संस्कृत अकादमी और विशिष्ट अतिथि प्रसिद्ध शायर के. के. तूर थे। कार्यक्रम का संचालन कविवर गणेश दत्त ने किया।
शायरों ने शायरी से शहीदों को दी श्रद्धांजलि
भंडारी अदबी ट्रस्ट के अध्यक्ष अशोक नादर ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम शहीदों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए आयोजित किए जाते रहने चाहिए ताकि रिआया को एहसास रहे कि आज़ादी की क्या कीमत है और ये कैसी कैसी कुर्बानियांं दे कर हासिल हुई है। देश के प्रति अगर रिआया अपनी जिम्मेदारी पूरी करनी है, वो भी देशभक्ति है। मुख्य अतिथि अग्निहोत्री ने कहा कि अपने शहीदों की वजह से ही आज़ादी की सााँस ले रहे हैं शहीदों के बलिदान को कभी भी भुलाया नहीं जा सकता। समाजसेवी के.के. शारदा ने भी अपने विचार रखे। इस सभी भाषाअों के कवियों ने देशभक्ति की रचनाओं से शहीदों को श्रद्धांजलि दी।
कविवर प्रेम विज़ ने कहा- हंस कर फांसी के फंदे चूम गए मां के आंचल को खुशबू से भर गए। कविवर सोमेश और नेहा ने अशोक नादर की रचनाओं से माहौल को देशभक्ति से सराबोर कर दिया। केके तूर ने फ़रमाया इस भला खुदगर्ज ज़माने में कौन अपना दिखाई देता है। अशोक नादर ने फ़रमाया हुई लाजिम सुनानी शोर्य की कहानी उनको वो उस पल से सुना दुनिया के आगे गिड़़गिड़ाते है। शम्स सब्रेजी, धवन कमल, संतोष गर्ग, विजेंदर चौहान, गणेश दत्त, चमन लाल शर्मा और आर. पी मल्होत्रा ने अपने-अपने कलाम पेश करके महफिल को देशभक्ति के रंग में रंग दिया।