चंडीगढ़, 5 अक्टूबर (न्यूज अपडेट इंडिया )- हरियाणा के सरकारी स्कूलों में मासिक परीक्षा को मात्र औपचारिकता समझने तथा नकल करवाने वाले अध्यापकों व स्कूल मुखियाओं की अब खैर नहीं। विद्यार्थियों को नकल करवाकर अपने स्कूल का परीक्षा परिणाम अच्छा दिखाने की कोशिश करने वाले स्कूल मुखिया अगर औचक निरीक्षण के दौरान पकडे गए तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इस बारे में जानकारी देते हुए हरियाणा स्कूल शिक्षा विभाग में सयुंक्त सचिव विरेंद्र सिंह सहरावत ने बताया कि स्कूलों मे पढऩे वाले विद्यार्थियों की शैक्षणिक क्षमता का आंकलन करने का मासिक परीक्षा एक महत्वपूर्ण साधन है। जब तक यह आंकलन पूरी ईमानदारी व निष्पक्षता से नहीं किया जाता तब तक यह पता नहीं चल पाता कि विद्यार्थी ने अध्यापक द्वारा पढ़ाया गया कितना सीखा है। उन्होंने बताया कि विभाग के मुख्यालय में कुछ ऐसी सूचनाएं अथवा शिकायतें मिली कि कई अध्यापकों या स्कूल मुखियाओं ने मासिक परीक्षा को मात्र ढकोसला बना दिया है और इन परीक्षाओं में विद्यार्थियों को खूब नकल करने की छूट देकर मर्यादाएं भंग कर दी हैं। सहरावत ने इस मामले को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि स्कूल शिक्षा विभाग ने इन परीक्षाओं को मजाक समझने वाले अध्यापकों के खिलाफ कड़े कदम उठाने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि विभाग ने मासिक परीक्षाओं की उत्तर-पुस्तिकाओं को सहेज कर रखने के पहले ही आदेश दिए हुए हैं। परीक्षा के बाद भी अगर कोई निरीक्षक स्कूल का औचक निरीक्षण करने आता है और किसी विद्यार्थी की उत्तर-पुस्तिका की जांच करता है तो शक होने पर वह उस विद्यार्थी से प्रश्न पूछ सकता है। उत्तर-पुस्तिका में लिखे गए प्रश्न के उत्तर से अगर विद्यार्थी ने 20 प्रतिशत तक कम बताया तो कोई बात नहीं, परंतु इससे अधिक गलत या कम उत्तर देने पर उस पेपर में जालसाजी के लिए संबंधित सब्जेक्ट का अध्यापक जिम्मेवार होगा। उन्होंने कहा कि परीक्षाओं की योजना तथा निष्पक्षता के साथ परीक्षा संचालित करवाने की जिम्मेवारी स्कूल मुखिया की होती है। परीक्षा के दौरान स्कूल मुखिया का मौके पर उपस्थित रहना आवश्यक है, अगर किसी कारणवश वह मौजूद नहीं रह पाता तो दूसरे नंबर के स्कूल इंचार्ज की डयूटी लगानी होगी, क्योंकि स्कूल के सभी संसाधन स्कूल मुखिया के अधीन होते हैं इसलिए अगर स्कूल के औचक निरीक्षण के दौरान परीक्षा में नकल होती पाई गई तो व्यक्तिगत रूप से स्कूल मुखिया ही उसका जिम्मेवार होगा। यदि कोई अध्यापक परीक्षा के दौरान विद्यार्थियों को नकल करने की अनुमति देता है तो स्कूल मुखिया को उसको ऐसा करने से रोकना होगा, तब भी वह अध्यापक नहीं मानता तो उसकी शिकायत विभाग के मुख्यालय में भेजी जाए ताकि उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सके। स्कूल शिक्षा के सयुंक्त सचिव ने मासिक परीक्षाओं के साथ-साथ वार्षिक परीक्षाओं में भी नकल करवाने वाले अध्यापकों को सचेत करते हुए कहा है कि व्यक्तिगत फायदे के लिए नकल करवाकर विद्यार्थियों का अच्छा परिणाम दिखाने वाले इन अध्यापकों के इस कृत्य को भविष्य में कतई सहन नहीं किया जाएगा। अगर विद्यार्थियों को नकल करने में सहयोग करने की कोई शिकायत मिली तो उस अध्यापक के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।