चंडीगढ़, 01 मई। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने पेट्रोल-डीजल पर सेस और सब्जी मंडी में मार्केट फीस बढ़ोतरी के फैसले को जनविरोधी करार दिया है। हुड्डा ने आरोप लगाया कि सरकार का फैसला लोगों की उम्मीद और विपक्ष के सुझावों के विपरीत है। कोरोना की मार झेल रहे गरीब, किसान, दुकानदार, दिहाड़ीदार, कामगार और कारोबारी समेत हर नागरिक को सरकार से राहत की उम्मीद थी, लेकिन इसके उल्ट उन्हें महंगाई की मार झेलनी पड़ेगी।
शुक्रवार को बढ़ाए गए पेट्रोल-डीजल के सेस पर हुड्डा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विपक्ष की ओर से सरकार को सुझाव दिए गए थे, लेकिन सरकार ने उम्मीदों के उल्ट जन विरोधी फैसला लिया, क्योंकि लॉकडाउन की वजह से तमाम काम-धंधे ठप पड़े हैं। अगर आगे लॉकडाउन खुलता भी है तो इस डेढ़ महीने के घाटे से उबरने में ही लोगों को कई महीने लगेंगे। गुरुवार को ही सर्वदलीय बैठक में सरकार को विपक्ष ने सुझाव दिए थे कि बिजली बिल, लोन की किश्त, किराये, टैक्सों और महंगाई से फौरी राहत दिलाई जाए, चाहे इसके लिए कुछ कर्ज ही क्यों न लेना पड़े। लेकिन सरकार ने जनता की और विपक्ष की उम्मीदों के उलट जनविरोधी फैसले किए हैं।
हुड्डा ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आज अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगभग शून्य पर पहुंच चुकी हैं। इस समय सरकार को कीमतों में कटौती कर आमजन को राहत दी जानी चाहिए थी। मगर सरकार ने टैक्स बढ़ाकर तेल को महंगा कर दिया। इसका सबसे ज्यादा भार आम जनता और विशेषकर किसान पर पड़ेगा। इसी तरह फल-सब्जी पर मार्केट फीस लगाकर कीमतों को बढ़ाने की दिशा में सरकार ने जो फ़ैसला लिया है, उसकी भी सबसे ज्यादा मार कमजोर तबके पर ही पड़ेगी। बस किराए के बोझ से भी सबसे ज्यादा आम आदमी ही दबेगा।
उन्होंने ने मांग की कि सरकार राशन कार्ड का रंग देखे बिना, सभी ज़रूरतमंदों को राशन मुहैया करवाए। लॉकडाउन में जिनके काम धंधे बंद हैं, ऐसे कामगारों, छोटे दुकानदारों और दिहाड़दारों को बिजली बिलों, लोन और टैक्स में राहत देनी चाहिए।