चंडीगढ़| हरियाणा में अब अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (एससी-एसटी) के आरक्षण की मौजूदा व्यवस्था बदलेगी। एससी-एसटी वर्ग के ज्यादा जरूरतमंदों को आरक्षण का लाभ देने के लिए प्रदेश सरकार एससी-एसटी वर्ग में उपवर्गीकरण करेगी। यानी कि आरक्षण के भीतर भी कोटा लागू किया जाएगा ताकि आरक्षण का लाभ उसी वर्ग के ज्यादा जरूरतमंद लोगों को मिल सके।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई नई सरकार की पहली मंत्रिमंडल बैठक में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करने की सहमति बन गई। एससी-एसटी में क्रीमी लेयर की पहचान के लिए नीति भी बनाई जाएगी। उपवर्गीकरण वाली जातियों को सौ प्रतिशत आरक्षण नहीं दिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट का निर्देश है कि वर्गीकरण तर्कसंगत सिद्धांत पर आधारित होना चाहिए। इसके लिए कम प्रतिनिधित्व और ज्यादा जरूरतमंद साबित करने के लिए आंकड़े जुटाए जाएंगे। उपवर्गीकरण का अधिकार सरकार के पास होगा, लेकिन एससी जाति के कुछ वर्गों तक ही आरक्षण का लाभ सीमित नहीं किया जा सकता। मूल वर्ग और उपवर्ग दोनों को आरक्षण का लाभ देना होगा।
नई सरकार ने पहली कैबिनेट बैठक में सुप्रीम कोर्ट के आदेश को प्रदेश में लागू करने पर लगाई मुहर
प्रदेश में अनुसूचित जाति के लिए 15 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति के लिए 7.5 प्रतिशत आरक्षण है। कैबिनेट के फैसले को लागू करने के लिए पहले नीति का ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा, जिसके बाद विधानसभा की मुहर लगेगी। इसके बाद एससी-एसटी वर्ग में आरक्षण के भीतर आरक्षण लागू हो जाएगा। प्रदेश में अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग में 36, पिछड़ा वर्ग-ए में 71 और पिछड़ा वर्ग बी में आठ जातियां शामिल हैं।