पंचकूला, 26 अक्टूबर। राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (एनआईए), पंचकूला में एंटी रैगिंग जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में माता मनसा देवी सेक्टर-5 थाना प्रभारी राजेश कुमारी ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की जबकि एडवोकेट रितू चौहान विशिष्ट अतिथि के तौर पर मौजूद रहीं। डीन इंचार्ज प्रोफेसर सतीश गंधर्व ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की और डीएमएस डॉ. गौरव गर्ग विशेष तौर पर मौजूद रहे।
आयुष मंत्रालय भारत सरकार के तत्वधान में संस्थान के कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) संजीव शर्मा तथा डीन प्रोफेसर गुलाब चंद पमनानी के मागदर्शन में विद्यार्थियों को रैगिंग के दुष्परिणामों, इससे जुड़े नियमों और रोकथाम के उपायों के प्रति जागरूक किया गया।
एमडीसी थाना प्रभारी राजेश कुमारी ने रैगिंग के दुष्परिणामों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सीनियर को जूनियर के साथ रैगिंग नहीं, बल्कि अनुभव साझा करने चाहिए, ताकि जूनियर, सीनियर को पूरा सम्मान दे। रैगिंग एक अपराध है, जिससे रैगिंग का शिकार होने वाले विद्यार्थी के साथ रैगिंग करने वाले विद्यार्थी के परिवार का समाज में सम्मान घटता है।
उन्होंने कहा कि युवा कॉलेज और विश्वविद्यालय में अपना भविष्य बनाने के लिए आता है, लेकिन कई बार उसे रैगिंग का शिकार होना पड़ता है। रैगिंग न केवल उसके भविष्य के लक्ष्य को बाधित करती है, बल्कि रैगिंग करने वाले युवा का करियर भी खराब होता है।
एनआईए में अनुशासित और सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण : सतीश गंधर्व
एनआईए में एंटी रैगिंग जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन
संस्थान के डीन इंचार्ज प्रोफेसर सतीश गंधर्व ने कहा कि एनआईए पंचकूला रैगिंग मुक्त परिसर है। संस्थान की ओर से विद्यार्थियों के लिए रैगिंग जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, ताकि वह रैगिंग से होने वाले दुष्परिणामों बारे अवगत हो सकें। संस्थान में सुरक्षित, अनुशासित और सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण को बढ़ावा देना तथा विद्यार्थियों को आपसी सम्मान, सहयोग और सौहार्द की भावना के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना रहा।
एडवोकेट रितू चौहान ने रैगिंग से होने वाले दुष्परिणामों बारे चर्चा की। उन्होंने अवगत कराया कि रैगिंग की रोकथाम केवल संस्थान प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक विद्यार्थी की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। विद्यार्थियों को किसी भी अनुचित गतिविधि के प्रति सजग रहने और ऐसी घटना की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने के लिए प्रेरित किया गया। उन्होंने अवगत कराया कि रैगिंग गैर जमानती अपराध है। रैगिंग होने की घटना विद्यार्थी को एंटी रैगिंग कमेटी के समक्ष शिकायत दर्ज करानी चाहिए या फिर डायल-112 और हेल्पलाइन नंबर 1800-180-1522 भी अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है। उन्होंने विस्तार से कानूनी कार्रवाई पर प्रकाश डाला।
मंच का संचालन एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रिचा मोहन ने किया। एंटी रैगिंग कमेटी के चेयरमैन एवं एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. वैभव फरताले ने कार्यक्रम के सफल आयोजन पर आभार व्यक्त करते हुए कहा कि एनआईए द्वारा विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, अनुशासन और पारस्परिक सम्मान की भावना को मजबूत करने की दिशा एंटी रैगिंग जागरूकता कार्यक्रम महत्वपूर्ण साबित होगा।