पंचकूला:- वरिष्ठ कांग्रेस नेत्री एवं हरियाणा प्रदेश महिला कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सुधा भारद्वाज ने महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि महर्षि वाल्मीकि जी का व्यक्तित्व भारतीय समाज की उस जीवंत परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें ज्ञान, चिंतन और रचनात्मकता के माध्यम से मानव जीवन को नई दिशा देने की शक्ति निहित है। उनका जीवन हमें सिखाता है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी चुनौतीपूर्ण हों, दृढ़ संकल्प और आत्मबोध से परिवर्तन का नया अध्याय लिखा जा सकता है।
सुधा भारद्वाज ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि जी द्वारा रचित रामायण केवल एक महान महाकाव्य ही नहीं, बल्कि मानवीय संबंधों, पारिवारिक मूल्यों, कर्तव्यबोध और जीवन की जटिल परिस्थितियों को समझने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी है। इसके पात्रों और प्रसंगों में निहित जीवन-दर्शन आज भी समाज को संवेदनशीलता, विवेक और नैतिक साहस के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि जी की जयंती हमें समाज के उन वर्गों के प्रति अपनी जिम्मेदारी का एहसास कराती है, जिन्हें लंबे समय तक शिक्षा, संसाधनों और अवसरों की असमानता का सामना करना पड़ा है। किसी भी सभ्य समाज की वास्तविक प्रगति तभी संभव है, जब प्रत्येक नागरिक को अपनी प्रतिभा निखारने, अपने सपनों को साकार करने और सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर मिले।
वरिष्ठ कांग्रेस नेत्री एवं पूर्व प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष ने वाल्मीकि जयंती पर दी शुभकामनाएं, शिक्षा और आत्मसम्मान को सामाजिक परिवर्तन का आधार बताया
महिलाओं के सशक्तीकरण और सामाजिक भागीदारी पर जोर देते हुए सुधा भारद्वाज ने कहा कि शिक्षा, आत्मनिर्भरता और अधिकारों के प्रति जागरूकता महिलाओं के जीवन में स्थायी बदलाव लाने के महत्वपूर्ण माध्यम हैं। महिलाओं को केवल अवसर देना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना भी आवश्यक है। एक प्रगतिशील समाज वही है, जहां बेटियों की आकांक्षाओं को प्रोत्साहन मिले और प्रत्येक महिला अपनी पहचान तथा क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ सके।
उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि जी की साहित्यिक विरासत हमें यह समझने का अवसर देती है कि समाज की मजबूती केवल आर्थिक विकास से नहीं, बल्कि उसकी संवेदनशीलता, न्यायप्रियता और मानवीय दृष्टिकोण से भी तय होती है। आज आवश्यकता इस बात की है कि हम अपने व्यवहार और सामाजिक जीवन में ऐसे मूल्यों को स्थान दें, जो आपसी विश्वास बढ़ाएं, भेदभाव की दीवारें तोड़ें और हर व्यक्ति के आत्मसम्मान की रक्षा करें।
सुधा भारद्वाज ने प्रदेशवासियों से आग्रह किया कि महर्षि वाल्मीकि जयंती को केवल उत्सव तक सीमित न रखते हुए इसे ज्ञान के प्रसार, सामाजिक जागरूकता और सकारात्मक बदलाव के संकल्प से जोड़ें। उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि जी की महान विरासत के प्रति सच्चा सम्मान यही होगा कि हम एक ऐसे समाज के निर्माण में योगदान दें, जहां किसी भी व्यक्ति की पहचान उसके सामाजिक परिवेश से नहीं, बल्कि उसकी प्रतिभा, कर्म और मानवीय गुणों से हो।
उन्होंने कामना की कि महर्षि वाल्मीकि जी के विचार समाज में नई चेतना का संचार करें तथा हर परिवार के जीवन में सुख, सम्मान, प्रगति और खुशहाली के नए अवसर लेकर आएं।