चंडीगढ़, 8 जुलाई। इलेक्ट्रिसिटी एम्पलाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया (ईईएफआई) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाष लांबा व सुरेश राठी ने कहा कि गुरुग्राम एवं नूंह में निजी कंपनी को समानान्तर बिजली वितरण लाइसेंस देने का प्रयास हरियाणा की सार्वजनिक बिजली व्यवस्था को कमजोर कर निजीकरण का रास्ता खोलने की एक सुनियोजित साजिश है। उन्होंने कहा कि बिजली कर्मचारी, किसान, इंजीनियर, उपभोक्ता और जनसंगठन इस जनविरोधी कदम को किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देंगे। उन्होंने बताया कि समानांतर लाइसेंस देने के प्रयासों के खिलाफ बुधवार को गुरुग्राम और नूंह की सभी डिवीजनों में कर्मचारियों ने दो घंटे जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
पैरलल लाइसेंस देने के खिलाफ बिजली कर्मचारियों, किसानों, इंजीनियरों और राजनीतिक दलों का जोरदार विरोध
गुरुग्राम और नूंह में दो घंटे कामकाज ठप, बिजली कर्मचारियों का व्यापक प्रदर्शन
हरियाणा में बिजली का निजीकरण किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं, समानान्तर लाइसेंस की साजिश को करेंगे विफल : सुभाष लांबा
आज हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC), पंचकूला में आयोजित जनसुनवाई में इलेक्ट्रिसिटी एम्पलाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाष लांबा ,गोपाल दत्त जोशी व सरदार गुरमीत सिंह, आल हरियाणा पावर कारपोरेशनज वर्कर यूनियन के चेयरमैन देवेंद्र हुड्डा व राज्य प्रधान सुरेश राठी , संयुक्त किसान मोर्चा के घटक अखिल भारतीय किसान सभा (हरियाणा) के महासचिव सुमित दलाल, आल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के मुख्य संरक्षक इंजिनियर परमजीत सिंह, हरियाणा पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन के प्रधान पुनित कुंडू व महासचिव रविन्द्र घणघस, एचएसईबी वर्कर्स यूनियन के महासचिव यशपाल देसवाल, जनवादी महिला समिति से सबिता मलिक, इंडियन नेशनल लोकदल के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री चौधरी संपत सिंह, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के राज्य सचिव कामरेड प्रेम चंद व राज्य कमेटी सदस्य वीरेंद्र मलिक सहित अनेक सामाजिक एवं जनसंगठनों ने एक स्वर में निजी कंपनी की समानांतर लाइसेंस देने की याचिका का कड़ा विरोध करते हुए आयोग से इसे तत्काल खारिज करने की मांग की। सभी ने एक स्वर में इसे हरियाणा की सार्वजनिक बिजली व्यवस्था को कमजोर कर निजीकरण का रास्ता खोलने की एक सुनियोजित साजिश करार दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जनता की आवाज को नजरअंदाज कर निजीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई तो कर्मचारी, किसान और सभी जनसंगठन संयुक्त रूप से प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और संबंधित अधिकारियों की होगी।
सुभाष लांबा ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम ने पिछले वर्षों में अपनी कार्यक्षमता, राजस्व संग्रह और तकनीकी सुधारों में उल्लेखनीय प्रगति की है। इसके बावजूद लाभदायक उपभोक्ताओं को निजी कंपनियों के हवाले करना और घाटे वाले उपभोक्ताओं का भार सरकारी निगम पर छोड़ देना न केवल सार्वजनिक क्षेत्र को कमजोर करेगा बल्कि भविष्य में बिजली दरों में वृद्धि, सरकारी सब्सिडी के बोझ और उपभोक्ताओं के शोषण का रास्ता भी खोलेगा।
उन्होंने कहा कि आज की जनसुनवाई में सभी संगठनों ने स्पष्ट किया कि समानान्तर लाइसेंस व्यवस्था से कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा, उपभोक्ताओं के हित, ग्रामीण एवं कृषि क्षेत्र की बिजली आपूर्ति तथा राज्य की ऊर्जा सुरक्षा पर गंभीर खतरा उत्पन्न होगा। एक साल पहले अस्तित्व में आई जिस निजी कंपनी ने लाइसेंस मांगा है, उसके पास इतने बड़े वितरण क्षेत्र को संचालित करने का कोई सिद्ध अनुभव नहीं है। ऐसे में प्रदेश की जनता के हितों को निजी मुनाफे के लिए दांव पर नहीं लगाया जा सकता।
उन्होंने कहा कि आज का विरोध केवल कर्मचारियों का आंदोलन नहीं, बल्कि किसानों, मजदूरों, इंजीनियरों, महिलाओं, उपभोक्ताओं और आम जनता का साझा संघर्ष है। जनसुनवाई में विभिन्न वर्गों की व्यापक भागीदारी ने यह सिद्ध कर दिया है कि हरियाणा की जनता सार्वजनिक बिजली व्यवस्था को बचाने के लिए एकजुट है।
सुभाष लांबा ने हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग से मांग की कि गुरुग्राम एवं नूंह के लिए समानान्तर वितरण लाइसेंस की याचिका को तत्काल खारिज किया जाए तथा सार्वजनिक बिजली वितरण प्रणाली को मजबूत बनाने, नियमित भर्ती करने, आधारभूत ढांचे के आधुनिकीकरण और उपभोक्ताओं को सस्ती एवं विश्वसनीय बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।