चंडीगढ़: कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने हरियाणा की भाजपा सरकार पर किसानों के साथ विश्वासघात करने और प्रदेश की कृषि व्यवस्था को पूरी तरह ठप करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि भाजपा सरकार कृषि को जानबूझकर घाटे का सौदा बनाने साजिश कर रही है। प्रदेश में मूंग और मक्के की फसलों की आवक शुरू होते ही "भाजपाई धोखाधड़ी" और "निजी हाथों की लूट" का खेल फिर से शुरू हो गया है। प्रदेश की भाजपा सरकार के "डिजिटल बैरियर्स" और कुप्रबंधन ने हरियाणा की खुशहाली की पहचान खेती-किसानी को आज "घाटे का सौदा और कर्ज का फंदा" बना दिया है।
प्रदेश में भाजपा के ‘एमएसपी धोखे’ और ‘लूट तंत्र’ की भेंट चढ़ी मूंग और मक्के की फसल और खाद संकट से किसान बेहाल।
किसान ₹8,682 MSP वाली मूंग को ₹6,000 में और ₹2,410 MSP वाले मक्का को ₹1,100 में बेचने पर मजबूर।
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सुरजेवाला ने आधिकारिक आंकड़ों और मंडियों की स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने मूंग की फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹8,682 प्रति क्विंटल तय किया है। इसके बावजूद, हरियाणा के भाजपाई सिस्टम के तहत मंडियों में मूंग की सरकारी खरीद न के बराबर है। नतीजतन, मजबूर किसानों को अपनी गाढ़ी कमाई की उपज निजी व्यापारियों को ₹6,000 प्रति क्विंटल तक के औने-पौने दामों पर बेचनी पड़ रही है। किसानों को सीधे तौर पर ₹2,600 प्रति क्विंटल से अधिक की भारी चपत लगाई जा रही है। सुरजेवाला ने मक्का उत्पादक किसानों की दुर्दशा को उजागर करते हुए कहा कि मौसम की मेहरबानी और किसानों की हाड़-तोड़ मेहनत से इस बार मक्के की पैदावार अच्छी हुई थी। सरकार ने कागजों पर मक्के की एमएसपी ₹2,410 प्रति क्विंटल घोषित कर रखी है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि मंडियों में मक्का ₹1,100 प्रति क्विंटल के स्तर पर पिट रहा है। किसानों को लागत निकालना भी भारी पड़ रहा है और उन्हें प्रति क्विंटल करीब ₹1,300 का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
कांग्रेस राष्ट्रीय महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने सरकार के "24 फसलों की एमएसपी पर खरीद" के चुनावी और प्रचारक दावों को एक क्रूर मजाक करार दिया। उन्होंने कहा कि इस समय मक्का और मूंग की सरकारी खरीद की कोई पुख्ता व्यवस्था मंडियों में दिखाई नहीं दे रही है। सीजन की शुरुआत में ही भाजपा का किसान-विरोधी चेहरा एक बार फिर बेनकाब हो गया है। सुरजेवाला ने बताया कि इस समय प्रदेश भर में धान की रोपाई और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई पूरे जोरों पर है, लेकिन किसान खेतों में काम करने के बजाय खाद के लिए लाइनों में लगने को मजबूर हैं। हरियाणा के लगभग सभी जिलों में डीएपी (DAP) और यूरिया खाद का स्टॉक या तो पूरी तरह खत्म हो चुका है, या फिर जरूरत के मुकाबले आपूर्ति न के बराबर है। कृषि विभाग और सरकार के पास इस बात का कोई जवाब नहीं है कि खाद की नई खेप कब आएगी। सरकार अपनी नाकामी और खाद की भारी तंगी को छुपाने के लिए भूमि रिकॉर्ड, बायोमैट्रिक मिलान और डिजिटल निगरानी जैसे तकनीकी हथकंडे अपना रही है। इन जटिल नियमों के कारण जो थोड़ा-बहुत खाद का स्टॉक उपलब्ध भी है, उसे हासिल करने में किसानों के पसीने छूट रहे हैं। नई खेप आने की तारीख और मौजूदा स्टॉक की जानकारी को जानबूझकर छुपाया जा रहा है, ताकि मंडियों में खाद की कालाबाजारी और मुनाफाखोरी के धंधे को बढ़ावा दिया जा सके।
रणदीप सिंह सुरजेवाला ने मुख्यमंत्री पर सीधा हमला बोलते हुए कहा, "हरियाणा के किसानों को चौतरफा परेशानियों से बांधकर, प्रदेश के बातूनी मुख्यमंत्री सिर्फ 'झूठ के बखानी' बने फिर रहे हैं। विज्ञापनों में किसान-हितैषी होने का ढोंग रचने वाली भाजपा असल में खेती-किसानी के लिए सबसे बड़ा संकट साबित हो रही है। फसल का सीजन कोई भी हो, किसान की लागत मारने और उसे कर्ज के दलदल में धकेलने का 'कारण' सिर्फ और सिर्फ भाजपा सरकार है। जिस हरियाणा की पहचान हमेशा से खुशहाल किसान और लहलहाते खेत-खलिहान रहे हैं, उसे भाजपा के 'डबल इंजन' के धोखे और अत्याचार ने बदहाली के मचान पर लाकर खड़ा कर दिया है।
कांग्रेस पार्टी मांग करती है कि हरियाणा भाजपा सरकार मंडियों में मूंग और मक्के की MSP पर 100% सरकारी खरीद सुनिश्चित करे, और किसानों को उनके हक का एक-एक पैसा दिलाए। सभी जिलों में डीएपी और यूरिया खाद की पर्याप्त आपूर्ति तुरंत बहाल की जाए ताकि अन्नदाता को इस सीजन में और अधिक नुकसान न उठाना पड़े। यदि सरकार ने तुरंत कदम नहीं उठाए, तो कांग्रेस किसानों के अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेगी।