चंडीगढ़, 3 नवंबर 2026: धीर कंस्ट्रक्शंस एवं वामना ग्रुप के प्रोजेक्ट राइज़ोनिक ने अपने दिवाली अभियान ‘इस दिवाली दिल रोशन करते हैं’ के तहत 3 नवंबर को राइज़ोनिक प्रोजेक्ट साइट पर ‘रोशनी का बाजार’ का आयोजन किया। इस विशेष पहल के माध्यम से दिवाली की खुशियों, भारतीय पारंपरिक हस्तशिल्प और सामुदायिक सहभागिता को एक मंच पर लाया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ट्राइसिटी के स्थानीय कुम्हारों और हस्तशिल्प कारीगरों की कला को पहचान दिलाने के साथ उन्हें आर्थिक एवं सामाजिक रूप से प्रोत्साहित करना था।
स्थानीय कुम्हारों से बनवाए एक लाख दीये; ‘धरा’ शॉर्ट फिल्म, हस्तशिल्प बाजार और ट्राइसिटी का सबसे बड़ा दीया रहे मुख्य आकर्षण
इस पहल के बारे में टीम राइज़ोनिक की ओर से अमित कुमार गुलाटी ने कहा, “दिवाली केवल अपने घरों को रोशन करने का त्योहार नहीं है, बल्कि अपने आसपास के लोगों के जीवन में भी खुशियों और उम्मीदों की रोशनी फैलाने का अवसर है। ‘इस दिवाली दिल रोशन करते हैं’ अभियान के माध्यम से हमारा उद्देश्य उन मेहनतकश हाथों और उनके हुनर को सम्मान देना था, जिनकी बदौलत हमारी पारंपरिक त्योहारी संस्कृति आज भी जीवंत है। ‘रोशनी का बाजार’ स्थानीय कुम्हारों और कारीगरों को एक बड़ा मंच, उचित पहचान और समाज से सीधे जुड़ने का अवसर प्रदान करने की दिशा में हमारा प्रयास था।”
इस अभियान के तहत राइज़ोनिक ने स्थानीय कुम्हारों और कारीगरों से एक लाख दीये बनवाए, जिससे पारंपरिक कारीगरी को बढ़ावा मिलने के साथ कारीगर परिवारों को प्रत्यक्ष आर्थिक सहयोग भी मिला। मिट्टी के ये दीये भारतीय संस्कृति और दिवाली की परंपरा का अभिन्न हिस्सा हैं। कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण ‘रोशनी का बाजार’ रहा, जहां स्थानीय कारीगरों ने अपने हाथों से तैयार किए गए विभिन्न हस्तशिल्प उत्पादों का प्रदर्शन किया और उन्हें सीधे आगंतुकों को बेचा। इस पहल ने लोगों को पारंपरिक कला और शिल्प से रूबरू होने का अवसर प्रदान किया। साथ ही, कारीगरों से सीधे खरीदारी के जरिए उनकी आजीविका को सहयोग देने का संदेश भी दिया गया।
इस अवसर पर ‘धरा’ नामक एक विशेष शॉर्ट फिल्म भी प्रदर्शित की गई, जिसमें स्थानीय कारीगरों के जीवन, उनके संघर्ष, मेहनत और पीढ़ियों से चली आ रही पारंपरिक शिल्पकला की झलक दिखाई गई। फिल्म के माध्यम से दर्शकों को हस्तनिर्मित उत्पादों के पीछे छिपी मेहनत और कारीगरों की वास्तविक कहानियों से परिचित कराया गया। कार्यक्रम में राइज़ोनिक साइट पर प्रदर्शित ट्राइसिटी का सबसे बड़ा दीया भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा। यह विशाल दीया सामूहिक एकता, उम्मीद और अपने घरों के साथ दूसरों के जीवन में भी खुशियों की रोशनी फैलाने के अभियान का प्रतीक बना।
इस पहल के तहत कुम्हार कॉलोनी के कारीगर परिवारों की सहायता पर भी विशेष ध्यान दिया गया। कार्यक्रम स्थल पर रखे गए डोनेशन बॉक्स के माध्यम से आगंतुकों को स्वेच्छा से योगदान देने और कारीगर परिवारों की दिवाली को खुशहाल बनाने की मुहिम से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया गया। ‘रोशनी का बाजार’ के माध्यम से राइज़ोनिक ने समाज और उन कारीगरों के बीच एक सार्थक संबंध स्थापित करने का प्रयास किया, जो अपनी मेहनत और हुनर से हमारी पारंपरिक कलाओं को जीवित रखे हुए हैं। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि दिवाली का वास्तविक अर्थ केवल अपने घरों को रोशन करना नहीं, बल्कि उन लोगों के जीवन में भी खुशी, सम्मान और अवसरों की रोशनी पहुंचाना है, जिनकी कारीगरी हमारे त्योहारों को खास बनाती है।