चंडीगढ़। हरियाणा सरकार और सफाई कर्मचारियों के बीच चल रहा विवाद सोमवार को और गहरा हो सकता है। कर्मचारियों को बढ़ा झटका देते हुए स्थानीय निकाय विभाग ने 30 कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त करने की तैयारी कर ली है। इनमें 11 नियमित तथा 10 अनुबंध के आधार पर काम करने वाले कर्मचारी हैं। सोमवार को सफाई कर्मियों के संबंध में सरकार बड़ा फैसला ले सकती है।
सरकार ने पहले हड़ताल कर रहे कर्मचारियों को काम पर लौटने के लिए 5 सितंबर तक का समय दिया था, और कहा था कि ऐसा न करने पर कानूनी और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। शनिवार रात 12 बजे यह अवधि समाप्त हो चुकी है। जिन 30 कर्मचारियों पर कार्रवाई हो सकती है, उन पर पिछले महीने कचरा उठाने में बाधा डालने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई हैं। शहरी निकाय विभाग के एक सीनियर अधिकारी के अनुसार नौकरी से निकालने के आदेश सोमवार को जारी होने की संभावना है। शनिवार तक का समय दिया गया था। रविवार को छुट्टी होती है। इसलिए, आदेश 7 सितंबर को जारी किए जाएंगे।
प्रदेश छह अगस्त से 16 हजार 509 कर्मचारी हड़ताल पर
आउटसोर्स कर्मचारियों के काम में अडग़ा डालने पर अब तक 30 के खिलाफ एफआईआर
हरियाणा में 'पालिका' रोल पर मौजूद कुल 13,091 सफाई कर्मचारी (कॉन्ट्रैक्ट वाले कर्मचारी) 6 अगस्त से हड़ताल पर हैं। उनका समर्थन करते हुए, कुल 3,418 रेगुलर सफाई कर्मचारी भी उनके साथ शामिल हो गए, जिससे कचरा उठाने का काम ठप हो गया है। प्रदेश के शहरों में जहां-तहां कचरे के ढेर लग गए हैं।
सरकार का दावा है कि वह कर्मचारियों की 13 में से 12 मांगों को मानने के लिए तैयार हो गई है। इनमें एलटीसी सुविधा, न्यूनतम वेतन, बीमा, पीएफ, रिस्क अलाउंस, दया के आधार पर मदद और सफाई कर्मचारियों व सीवरमैन का क्लर्क के पदों पर प्रमोशन शामिल है। विवाद की मुख्य वजह कर्मचारियों को पक्का करना है, जिसे सरकार कानूनी अड़चनों का हवाला देते हुए मानने को तैयार नहीं है।
फिलहाल, अर्बन लोकल बॉडीज़ डिपार्टमेंट कचरा उठाने के लिए 16,657 आउटसोर्स कर्मचारियों पर निर्भर है। समस्या यह है कि हड़ताल कर रहे कर्मचारी कचरा उठाने से रोक रहे हैं। झड़पें हो रही हैं। अब तक कई एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं।