चंडीगढ़, 25 अगस्त। हरियाणा के शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा ने कहा है कि राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का व्यापक सर्वे पूरा कर लिया गया है। इस सर्वे के आधार पर प्रत्येक जिले में स्कूलों की तात्कालिक जरूरतों और कमियों की सटीक पहचान की गई है। इसी डेटा के आधार पर अब जरूरत के अनुसार विकास योजनाएं तैयार की जा रही हैं।
'सुपर 100' की सीटें बढ़ाकर 500 की गईं
250 सीएम-ईईई स्कूल बनेंगे राज्य के मॉडल स्कूल
एसएमसी को मिले वित्तीय अधिकार
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मंगलवार को चंडीगढ़ में उच्च शिक्षा विभाग और स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों की समीक्षा बैठक में उन्होंने बताया कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों मेंहरियाणा के शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा ने कहा है कि राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का व्यापक सर्वे पूरा कर लिया गया है। इस सर्वे के आधार पर प्रत्येक जिले में स्कूलों की तात्कालिक जरूरतों और कमियों की सटीक पहचान की गई है। इसी डेटा के आधार पर अब जरूरत के अनुसार विकास योजनाएं तैयार की जा रही हैं। विद्यार्थियों को बेहतर और आरामदायक कक्षा वातावरण प्रदान करने के लिए ड्यूल डेस्क की खरीद प्रक्रिया तेजी से शुरू कर दी गई है। वर्तमान में टेंडर प्रक्रिया जारी है और विभाग का लक्ष्य है कि नवंबर 2026 तक सभी लक्षित स्कूलों में ड्यूल डेस्क उपलब्ध करा दिए जाएं। मंत्री ने कहा कि प्रदेश में 250 सीएम-ईईई स्कूलों की पहचान की गई है। पीएम-श्री स्कूलों की विकास प्रक्रिया से जुड़े इन स्कूलों का चयन कड़े मानदंडों के आधार पर किया गया है। इनके लिए विशेष 'स्कूल विकास योजनाएं' तैयार की गई हैं, जिनसे यहां के पढ़ाई के माहौल, शैक्षणिक गुणवत्ता और इंफ्रास्ट्रक्चर में अभूतपूर्व सुधार होगा। इन्हें राज्य के अग्रणी मॉडल स्कूलों के रूप में स्थापित किया जाएगा।
मंत्री ने कहा कि फ्रांस के दूतावास के सहयोग से 60 शिक्षकों को प्रशिक्षित कर 26 सरकारी स्कूलों में फ्रेंच की कक्षाएं शुरू कर दी गई हैं। वहीं जर्मन भाषा के लिए 80 शिक्षकों का चयन कर जर्मन दूतावास के सहयोग से प्रशिक्षण प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि मेधावी छात्रों को आईआईटी और नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले 'सुपर 100' कार्यक्रम में सीटों की संख्या 400 से बढ़ाकर 500 कर दी गई है। इसके दो ऑफलाइन केंद्रों की स्थापना की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई है, जिससे होनहार छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं का बेहतर मार्गदर्शन मिलेगा। स्थानीय समुदाय और अभिभावकों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए एसएमसी को मजबूत किया गया है। अब 1 लाख रुपये तक के विकास कार्य सक्षम अधिकारी की मंजूरी से और 25 लाख रुपये तक के आधारभूत कार्य एडीसी की मंजूरी से कराए जा सकते हैं।