सदन में चर्चा और विधायकों की सहभागिता इस अवसर पर सदन में उपस्थित विभिन्न विधायकों ने प्राकृतिक खेती से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए, जिनका आचार्य देवव्रत ने विस्तार से उत्तर दिया। चर्चा के दौरान विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्रों के अनुभव साझा किए और बताया कि किस प्रकार किसान पारंपरिक खेती से धीरे-धीरे प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ रहे हैं। कई सदस्यों ने उत्पादन, लागत, प्रशिक्षण और बाजार से जुड़े पहलुओं पर जिज्ञासा व्यक्त की, जिनका राज्यपाल ने अपने अनुभव और वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर समाधान प्रस्तुत किया।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यदि सभी मिलकर इस दिशा में कार्य करें, तो प्राकृतिक खेती के माध्यम से देश न केवल स्वास्थ्य संकट से उबर सकता है, बल्कि आर्थिक रूप से भी सशक्त बन सकता है और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित, स्वस्थ और समृद्ध भारत का निर्माण संभव है।