चंडीगढ़, 26 अक्टूबर: पंजाब भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने पंजाब सरकार को राज्यभर में करवाए गए नशा संबंधी सर्वे की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की चुनौती दी। उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी का वास्तविक उद्देश्य पंजाब के नशे के कारोबार का व्यावसायिक नजरिये से अध्ययन करना था, ताकि इस अवैध धंधे पर कब्जा करके अधिकतम कमाई की जा सके। आज यहां एक पत्रकार वार्ता में आपस में जुड़ी घटनाओं की कड़ियां पेश करते हुए जाखड़ ने आरोप लगाया कि इन घटनाक्रमों के पीछे की कारोबारी रणनीति भगवंत मान के बजाय अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया की थी, क्योंकि ऐसी शातिर साजिश रचने में यही दोनों सक्षम हैं।
जाखड़ ने कहा कि सर्वे पर ₹250 करोड़ खर्च किए गए और 28,000 कर्मचारियों को लगाया गया। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में 65 लाख परिवारों को अपमानित किया गया, लेकिन सर्वे की रिपोर्ट का कहीं कोई अता-पता नहीं है। उन्होंने सवाल किया, “रिपोर्ट कहां है?”
*आरोप लगाया कि सर्वे का उद्देश्य नशे के कारोबार पर कब्जा करने के लिए उसका व्यावसायिक मॉडल तैयार करना था
* सिलसिलेवार मामलों की कड़ियां जोड़ते हुए आरोप लगाया कि सत्ताधारी पार्टी के संरक्षण में चल रहा है नशे का अवैध कारोबार।
* आरोप लगाया कि करोड़ों रुपये के साथ पकड़े गए ड्रग इंस्पेक्टर को पदोन्नति दी गई, जबकि नशा तस्करी और हत्या में शामिल अपराधी हैरी को सरकार ने दुबई भागने में मदद की।
उन्होंने आरोप लगाया कि सर्वे का उद्देश्य न तो पंजाब का भला करना था और न ही उसकी समस्याओं का समाधान करना, बल्कि राज्य की छवि खराब करना और नशे के कारोबार की कार्यप्रणाली को व्यवस्थित ढंग से समझना था, ताकि उसकी पूरी आपूर्ति शृंखला—खरीद से वितरण तक और पंजाब में नशा पहुंचने से लेकर उसकी अंतिम बिक्री तक—पर कब्जा किया जा सके।जाखड़ ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री अपने दावे के अनुसार गांवों में गए होते, तो सर्वे की जरूरत ही नहीं पड़ती, क्योंकि लोग खुद उन्हें जमीनी हालात बता देते। इसके बजाय, उन्होंने आरोप लगाया कि इस कवायद का इस्तेमाल एक कारोबारी मॉडल तैयार करने के लिए किया गया।
मामलों की कड़ियां जोड़ते हुए जाखड़ ने डीजीपी के उस बयान का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि नशे के सेवन में अब नशीली दवाओं की हिस्सेदारी 80 प्रतिशत है। जाखड़ ने आरोप लगाया कि इसी के अनुरूप सरकार ने नशीली दवाओं की पूरी आपूर्ति शृंखला पर कब्जा करने की योजना तैयार की। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार से जुड़ी भारी रकम के साथ पकड़े गए एक ड्रग इंस्पेक्टर को सरकार ने अपने साथ मिला लिया, बहाल किया और ड्रग कंट्रोलर नियुक्त कर दिया, जिससे यह कारोबार उसके नियंत्रण में आ गया।
एक अन्य मामले का जिक्र करते हुए जाखड़ ने कहा कि 2023 में थाना नथाना की पुलिस ने चार किलोग्राम हेरोइन बरामद की थी। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान फिरोजपुर जेल में बंद हैरी मुख्य आरोपी के रूप में सामने आया था। जाखड़ के अनुसार, अबोहर के एक बहुचर्चित हत्याकांड में हैरी को 20 वर्ष की सजा हुई थी और उसके खिलाफ सात अन्य मामले भी थे। जाखड़ ने आरोप लगाया कि सरकार ने जनवरी 2024 में फाजिल्का के उपायुक्त और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के माध्यम से हैरी को पैरोल दिलवाई, जिसके बाद वह फरार होकर दुबई पहुंच गया। उन्होंने दावा किया कि हैरी अब अबोहर से लुधियाना तक नशा तस्करी और जबरन वसूली का नेटवर्क चला रहा है, जबकि पुलिस ने उसकी फाइल बंद कर दी है।
* सीबीआई से जांच की शुरुआत दवा की दुकानों के बजाय ड्रग कंट्रोलर के कार्यालय से करने की अपील।
* हैरी और करम सिंह से जुड़े मामलों की एनआईए जांच की मांग।
इस शृंखला की तीसरी कड़ी बताते हुए जाखड़ ने “बाज” एंटी-ड्रोन प्रणाली से जुड़े कांस्टेबल करम सिंह का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उससे 25 किलोग्राम हेरोइन बरामद हुई थी और उसने 24 अन्य खेपों की व्यवस्था करने की बात भी स्वीकार की थी। जाखड़ ने सवाल उठाया कि क्या कांस्टेबल ने यह सब अकेले किया था या इसमें वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे। उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्र में कथित तौर पर आम आदमी पार्टी से जुड़े सरपंचों और नेताओं से नारकोटिक्स ब्यूरो द्वारा की गई नशे की बरामदगी का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि ये कड़ियां दर्शाती हैं कि पंजाब में नशे की खरीद, ढुलाई और बिक्री पर पार्टी से जुड़े लोगों का नियंत्रण था।
जाखड़ ने कहा कि ये मामले एक विकसित किए जा रहे कारोबारी मॉडल के तहत संचालित बड़े नेटवर्क की ओर इशारा करते हैं। उन्होंने टिप्पणी की कि आज पंजाब में केवल गैंगस्टर और अपराधी ही सुरक्षित हैं। उपर्युक्त मामलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जेलों में बंद लोग भी नशे और हथियारों का कारोबार संचालित करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिन ड्रोन मार्गों से नशा लाया जा रहा है, उन्हीं से ऐसे हथियार भी पहुंचाए जा रहे हैं, जो पंजाब के युवाओं की जान ले रहे हैं।
जाखड़ ने कहा कि यह हैरानी की बात है कि मुख्यमंत्री ने परविंदर सिंह के परिवार का दुख साझा करने के लिए एक बार भी मानसा जाना उचित नहीं समझा। उन्होंने नशीली दवाओं के दुरुपयोग और ड्रग इंस्पेक्टर की कथित भूमिका को लेकर उठ रहे अनेक सवालों के बावजूद स्वास्थ्य मंत्री की चुप्पी पर भी सवाल उठाया। उन्होंने सीबीआई से अपील की कि मानसा के परविंदर “झोटा” मामले की जांच का दायरा चंडीगढ़ स्थित ड्रग कंट्रोलर के कार्यालय तक बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि जांच की शुरुआत दवा की दुकानों से करने के बजाय पहले नेटवर्क को संचालित करने वालों की जांच की जानी चाहिए और फिर जहां-जहां कड़ियां जुड़ती जाएं, वहां तक पहुंचना चाहिए। उनके अनुसार, इससे सीबीआई उन लोगों तक पहुंच सकेगी, जिन्होंने नशे के कारोबार को एक व्यावसायिक मॉडल का रूप दिया है।
जाखड़ ने आगे कहा कि वह केंद्रीय गृह मंत्री को पत्र लिखकर कांस्टेबल करम सिंह और हैरी से जुड़े मामलों की सीबीआई जांच की मांग करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि हैरी को दुबई भागने में सरकार ने मदद की थी। उन्होंने कहा कि इन मामलों में नशे और हथियारों की अंतरराष्ट्रीय तस्करी शामिल है और एनआईए के पास इनकी निष्पक्ष तथा प्रभावी जांच करने की क्षमता है।
जाखड़ ने कहा कि भगवंत मान सरकार जनता का विश्वास खो चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि हाई कोर्ट के आदेशों के बावजूद गुरी चहल मामले की जांच शुरू नहीं हुई है। उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पंजाब में संचालित संगठित नशा नेटवर्क का पर्दाफाश करेंगे।