पटना / विशेष संवाददाता । डॉ. श्याम नंदन प्रसाद लंबे समय से वृक्षारोपण , वायु प्रदूषण , जल प्रदूषण और प्लास्टिक प्रदूषण के खिलाफ अभियान चला रहे हैं तथा परिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं । उन्होंने इस उद्देश्य की प्राप्ति हेतु एक " एसोसिएशन ऑफ एनवायरनमेंटल स्ट्डीज / A E S " ग्रुप की स्थापना की , जो शिक्षाविदों और पर्यावरण प्रेमियों को एक मंच पर लाकर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है । इस ग्रुप में देश के जाने माने पर्यावरणविद् , शिक्षाविद , माननीय कुलपति गण , पर्यावरण प्रेमी , डॉक्टर्स , इंजीनियर्स , एडवोकेट्स, प्राचार्य गण और प्राध्यापक गण माननीय सदस्य हैं । इन महानुभावों के सहयोग , योगदान और आशीर्वाद से यह ग्रुप अब अपनी ऊंचाइयों को छूने जा रहा है ।
बालकनी में लौटा जीवन : डॉ. श्याम नंदन प्रसाद , पर्यावरणविद् की एक प्रेरक उपलब्धि
मानव जीवन के लिए वरदान गौरैया प्राकृतिक वास और अनुकूल भोजन की तलाश में दर दर भटक रही है । शहरों में पेड़ों की अंधा धुंध कटाई कर अपार्टमेंट्स और भवनों का निर्माण किए जाने से ही ऐसी विषम स्थिति उत्पन्न हुई है । इसके लिए मानव जिम्मेवार है । यहां बताते चलें कि गौरैया परिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने में बहुत ही महत्व्पूर्ण भूमिका निभाती है और मानव के साथ रहना पसंद करती है । गौरैया हमारे किसान भाइयों के मित्र होते है । ये खेतों में उपस्थित हानिकारक कीड़ों को खाकर भूमि की उर्वरक शक्ति को बनाए में महत्व्पूर्ण भूमिका निभाते हैं । पूछे जाने पर डॉ. प्रसाद ने कहा कि शहरों में गौरैया की संख्या तेजी से घटती जा रही हैं । स्थिति ऐसी आ गई है कि गौरैया अब विलुप्ति की ओर अग्रसर है।
विशेष संवाददाता द्वारा डॉ. श्याम नंदन प्रसाद से लिए गए साक्षात्कार के आधार पर एक रिपोर्ट - श्रृंखला - 02
यदि इसका संरक्षण नहीं किया गया, तब आज वैश्विक स्तर पर मौजूद पर्यावरण संकट में एक और अध्याय जुड़ जायेगा। इस विषम परिस्थिति को देखते हुए डॉ. प्रसाद ने रूठी हुई गौरैया को पटना शहर में वापस लाने का दृढ़ निश्चय किया । इस उद्देश्य की प्राप्ति हेतु डॉ. प्रसाद अपनी जीवनसंगिनी के सहयोग से अपने फ्लैट की बालकनी में गौरैया के लिए प्राकृतिक वास / वातावरण का निर्माण किया और उसके लिए अनुकूल दाना पानी की व्यवस्था की । यह सिलसिला चलता रहा । आखिर वह शुभ दिन आया । डॉ. प्रसाद ने देखा कि उनकी बालकनी में 20 - 25 की संख्या में गौरैया आकर रखे गए दाना पानी को चुग रही है । डॉ. प्रसाद ने बताया कि वह क्षण मेरे जीवन का सबसे मधुर पल था । यही नहीं , गौरैया की मधुर आवाज और चहचहाट से मैं भाव विभोर हो गया । इस अनुपम दृश्य को मैने अपने कैमरे में कैद किया । आज भी गौरैया की झुंड प्रतिदिन डॉ. प्रसाद के फ्लैट की बाल्कनी में नियमित रूप से आती है । इस उपलब्धि को कई समाचार पत्रों ने कवरेज के साथ प्रकाशित किया ।
भारत के पूर्व राष्ट्रपति मिसाइल मैन डॉ. ए पी जे अब्दुल कलाम साहब के सपनों को साकार करने के उद्देश्य से स्थापित प्रतिष्ठित ख्वाब फाउंडेशन ने डॉ. प्रसाद की पर्यावरण संरक्षण की दिशा में पटना शहर में गौरैया की वापसी में उनके उत्कृष्ट और उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें अति प्रतिष्ठित " डॉ. कलाम लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड 2025 से नवाजा है । डॉ. प्रसाद ने जोर देकर कहा कि कोई भी सज्जन अगर अपने फ्लैट या घर में गौरैया के लिए प्राकृतिक वास और अनुकूल दाना पानी की व्यवस्था करते हैं , तब मेरा मानना है कि उनके यहां भी गौरैया आकर्षित होकर आएगी और अपनी मधुर आवाज और चहचहाट से उन्हें भाव विभोर कर देगी । " जरूरत है दृढ़ निश्चय और लगन की " ।
डॉ. प्रसाद की पहल न केवल उनके पर्यावरण प्रेम को दर्शाता है , बल्कि पूरे समाज को भी पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करता है । डॉ. प्रसाद ने पूरे आत्मविश्वास के साथ विशेष संवाददाता को बताया कि छोटे छोटे प्रयासों से ही बड़े बदलाव की नींव रखी जाती है । अंत में , डॉ. प्रसाद ने आह्वान किया कि बेहतर पर्यावरण भविष्य के लिए हमें पेड़ लगाने चाहिए और उनकी सेवा अपने परिवार की तरह तब तक करनी चाहिए , जब तक वह पौधा बड़ा होकर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में योगदान देने लायक नहीं हो जाए ।
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हमारे प्रेरणास्त्रोत -
श्री संजय कुमार , गौरैया मैन ऑफ बिहार , न्यू दिल्ली , इंडिया ।
पद्मश्री डॉ. आर के सिन्हा , डॉल्फिन मैन ऑफ इंडिया , पटना , बिहार , इंडिया ।
श्री अरविंद मिश्र , बर्ड मैन ऑफ बिहार , भागलपुर , बिहार , इंडिया ।
श्री निशांत रंजन , अध्यक्ष , एनवायरनमेंट वॉरियर्स , पटना , बिहार , इंडिया ।
श्रीमती कविता सिंह , गौरैया प्रेमी और गौरैया के लिए कृत्रिम घोंसला निर्मात्री , भरतपुर , राजस्थान , इंडिया ।