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जीवन शैली

प्राध्यापक से लेकर पर्यावरणविद् तक का सफर : श्रंखला - 01

Updated on Saturday, April 25, 2026 10:12 AM IST

डॉ नदीम अहमद
पटना / विशेष संवाददाता । डॉ. श्याम नंदन प्रसाद ने अपने करियर की शुरुआत एक प्राध्यापक के रूप में की और शिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिए रचनात्मक प्रयास किया । अपनी नई शिक्षण तकनीक के सहारे छात्र छात्राओं के बीच उन्होंने गहरी पैठ बनाई । अपनी करियर की शुरुआती दौर में डॉ. प्रसाद पर्यावरण संरक्षण में रुचि लेने लगे । शोध के लिए उन्होंने पर्यावरण के टॉपिक को ही चुना । प्लांट इकोलॉजी पर डॉ. प्रसाद ने दिन रात कड़ी मेहनत कर पी. एचडी. की डिग्री प्राप्त की । उसके बाद भी डॉ. प्रसाद शोध कार्य में लगे रहे। उनके मार्गदर्शन में कई रिसर्च स्कॉलर को पी. एचडी. की डिग्री से अलंकृत किया गया । डॉ. प्रसाद के अनगिनत शोध पत्र प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हुए हैं । आज भी यह सिलसिला जारी है।

विशेष संवाददाता द्वारा डॉ. श्याम नंदन प्रसाद , पर्यावरणविद् से लिए गए साक्षात्कार पर आधारित रिपोर्ट

 


डॉ. प्रसाद ने कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार , कांफ्रेंस , सिम्पोजियम और वर्क शौप में भाग लिया है और अपने शोध पत्रों को पढ़ा और प्रेजेंट किया है । वर्ष 2007 में डॉ. प्रसाद जब राम लखन सिंह यादव कॉलेज , बख्तियारपुर , पटना के स्नातकोत्तर वनस्पति शास्त्र विभाग में अध्यक्ष के पद पर आसीन थे , उसी दौरान उनके नेतृत्व में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा संपोषित एक राष्ट्रीय सेमिनार का सफलतापूर्वक का आयोजन किया गया था । इस सेमिनार में देश और विदेश के विशेषज्ञों ने भाग लेकर सेमिनार में चार चांद लगा दिया था । समाचार पत्रों में उनके आलेख बराबर प्रकाशित होते रहते हैं । पूछे जाने पर डॉ. प्रसाद ने बताया कि वे न‌ केवल वनस्पति शास्त्र के क्षेत्र में ही आलेख लेखन का कार्य करते हैं , बल्कि उनकी अभिरुचि उन क्षेत्रों में भी है जो मानव कल्याण के जरूरी है।
पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में डॉ. प्रसाद ने एक मुकाम हासिल किया है। उनके उत्कृष्ट और उल्लेखनीय योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित संगठनों और फाउंडेशन द्वारा उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय अवार्डों से नवाजा गया है । भारत के पूर्व राष्ट्रपति & मिसाइल मैन‌‌ डॉ. ए पी जे अब्दुल कलाम साहब के सपनों को साकार करने के उद्देश्य से स्थापित कलाम फाउंडेशन ने डॉ. प्रसाद के पर्यावरण संरक्षण की दिशा में किए गए उत्कृष्ट और उल्लेखनीय योगदान को एक पारखी की तरह परख कर डॉ. प्रसाद को अति प्रतिष्ठित " डॉ. कलाम लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड 2025 " से नवाजा है । पूछे जाने पर डॉ. प्रसाद ने बताया कि इस अवॉर्ड को पाते ही उनमें एक नई शक्ति , उत्साह, चेतना और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होने लगा और वे और तीव्र गति से पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया ‌। डॉ. ने जोर देकर कहा कि जब तक उनकी सांसें चलती रहेंगी और उनके शरीर में रक्त का एक बूंद भी बचा रहेगा , तब तक आज वैश्विक स्तर पर पर्यावरण संकट से जूझ रहे मानव और पारिस्थितिकी तंत्र के अन्य जीवों को मुक्ति दिलाने का हर संभव प्रयास करता रहूंगा।
एक प्राचार्य के रूप में डॉ. प्रसाद ने अपने कार्यकाल के दौरान अकादमिक और प्रशासनिक सुधार किया । जिन महाविद्यालयों में डॉ. प्रसाद प्राचार्य के पद पर कार्यरत रहे , उन महाविद्यालयों को स्वच्छ , सुंदर और हरा भरा बनाने का हर संभव प्रयास किया। प्राचार्य पद से सेवानिवृत होने के बाद डॉ. प्रसाद अभी नालंदा खुला विश्वविद्यालय , नालंदा के वनस्पति शास्त्र विभाग में समन्वयक के पद पर कार्यरत हैं । यहां भी डॉ. प्रसाद पर्यावरण संरक्षण की दिशा में जागरूकता पैदा करने में क्रियाशील हैं । एक समन्वयक के रूप में डॉ. प्रसाद अपने दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन कर रहे हैं।
दिनांक 14 अप्रैल , 2026 को भारत रत्न , भारतीय संविधान के मुख्य शिल्पकार और समाज सुधारक डॉ. भीम राव अंबेडकर जी की जयंती मनाई गई । इसी दिन डॉ. प्रसाद का एक महत्वपूर्ण आलेख " एक पर्यावरणविद् के रूप में भारत रत्न डॉ. भीम राव अंबेडकर के विचारों का समीक्षात्मक मूल्यांकन " शीर्षक से समाचारपत्रों में प्रकाशित हुआ , जिसमें डॉ. प्रसाद ने डॉ. अंबेडकर साहब के बारे में एक नई अवधारणा को प्रस्तुत किया । उन्होंने डॉ. अंबेडकर को एक पर्यावरणविद् के रूप में पेश किया । डॉ. प्रसाद ने हमारे विशेष संवाददाता को बताया कि डॉ. अंबेडकर भारतीय संविधान के निर्माण के दौरान जल प्रबंधन पर विशेष फोकस किया था । डॉ. अंबेडकर इतने दूरदर्शी थे कि उस वक्त उन्होंने भांप लिया था कि भविष्य में पर्यावरण संकट आ सकता है । आज वैश्विक स्तर पर मौजूद पर्यावरण संकट से जूझ रहे मानवों को निजात दिलाने में डॉ. अंबेडकर के पर्यावरणीय दृष्टिकोण/ विचार प्रासंगिक है ।

शेष अगली कड़ी में...।

Readers' Comments
लादूराम प्रजापति, बालूपुरा आदर्श नगर अजमेर 5/28/2026 12:39:52 PM

पर्यावरण हमारा अच्छा होगा तो हमारे प्रत्येक मानव अन्य जीवों का जीवन कुशल बनेगा। सभी जीवो में ,वनस्पतियों का आज मानव दोहन कर रहा है। मानव जाति को अपनी सोच बदलनी पड़ेगी और पर्यावरण में अपना योगदान देना होगा जिससे हमारा राष्ट्र में हरित क्रांति आएगी। प्रत्येक व्यक्ति को पर्यावरण के बारे में चिंतन करना होगा और प्रत्येक व्यक्ति यह सोच ले कि मैं अपने घर के पास घर के अंदर और बाहर पेड़ पौधों , जीव जंतुओं पक्षियों को संरक्षण देने के लिए उनको भोजन,दाना, पानी,रैन बसैरे की व्यवस्था की जाए। जिससे हमारा पर्यावरण शुद्ध होगा और चारों तरफ हरित क्रांति का एक बिगुल बजेगा । मेरा सरकार से भी यह आगे है वह निवेदन है कि पर्यावरण पर विशेष ध्यान दिया जाए वह जहां सड़क का निर्माण होता है उसके चारों तरफ किनारे किनारे पेड़ पौधों का कटाने की बजाय लगाने का प्रयत्न करें। देखा गया है कि वन विभाग जहां पेड़ होते होते हैं वहां पर उनकी जेसीबी द्वारा कटाई-छटाई और उखाड़ के पेड़ों को काट दिया जाता है ।और वहां पर जो स्थापित कर दिया जाता है उद्योग ऐसी जगह लगाना चाहिए जहां पर वन विभाग या पेड़ पौधे,जीव जंतुओं या जल स्रोत कम से कम हो और उसर जमीन हो वहां पर उद्योग लगाया जाए। जिससे पेड़ पौधों ,जीव जंतुओं को उजाड़ने से बचाया जाए।पर्यावरण को संतुलित करते हैं। सरकार से यह भी मेरी विनती है कि जगह-जगह पर जल संरक्षण का भी प्रबंध किया जाए। सरकार से मेरा यह भी निवेदन है कि जो भी सरकारी और गैर सरकारी आवासीय कॉलोनी होती है वहां पर पेड़ पौधा लगाना अनिवार्य कर दिया जाए और जो ने लगाई उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाए।

Prof. ( Dr. ) Shyam Nandan Prasad 5/28/2026 12:08:04 PM

Very nice and appreciable . Congratulations

Dr. Shyam Nandan Prasad , ENVIRONMENTALIST 4/25/2026 7:35:26 PM

I express Gratitude for publishing my article with full coverage . This article will be a Landmark in the field of Environment Protection.

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