चंडीगढ़ । इंसान के हृदय में चार वाल्व होते हैं जो खून के बहाव को कंट्रोल करते हैं, पर कई बार ठीक तरीके से खुल व बंद नहीं हो पाते, जिसके कारण हृदय शरीर के अंगों तक पर्याप्त खून नहीं पहुंचा पाता है जोकी जानलेवा हो सकता है, इस गंभीर रोग को एओर्टिक स्टेनोसिस कहते हैं ।
एओर्टिक स्टेनोसिस से ग्रस्त पंचकूला निवासी 87 वर्षीय तारा चंद (बदला हुआ नाम) वर्ष 2024 में गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंचा, बचने की उम्मीद कम थी, उम्र ज्यादा होने के साथ साथ अन्य गंभीर बीमारियों के कारण हार्ट सर्जरी संभव नहीं थी । डॉ बाली ने उनके हृदय के एओर्टिक वाल्व रिप्लेसमेंट के लिए गैर-सर्जिकल प्रक्रिया टीएवीआर का उपयोग करते हुए इलाज कर दिया और आज वे हमारे बीच में स्वस्थ जीवन जी रहे हैं ।
डॉ. बाली ने 50 बुजुर्ग मरीजों का सफलतापूर्वक किया इलाज
टीएवीआर - ट्रांसकेथेटर एओर्टिक वाल्व रिप्लेसमेंट के माध्यम से ठीक हो चुके 70 से 85 साल के हृदय रोगियों की उपस्थिति में इस गैर-सर्जिकल प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी देते कार्डियक साइंसेज लिवासा ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के अध्यक्ष डॉ. एचके बाली ने कहा यह मिनिमल इनवेसिव प्रक्रिया है और जिसके तहत बिना ओपन हार्ट सर्जरी के पुराने (खराब), क्षतिग्रस्त वाल्व को हटाए बिना एक नया वाल्व रोगग्रस्त वाल्व के अंदर रखा गया है।
टीएवीआर सफल उपचार प्रक्रिया इसलिए भी है क्यूंकी एओर्टिक स्टेनोसिस मुख्य रूप से बुजुर्ग रोगियों में ज्यादा पाया जाता है और अक्सर ये किडनी यां फेफड़े यां शुगर, आदि गंभीर बीमारियों से ग्रस्त होते हैं यां पहले ही वाल्व डलवा चुके होते है इसलिए उन्मे ओपन हार्ट सर्जरी के माध्यम से सर्जिकल वाल्व डालना खतरे से खाली नहीं होता ।