बेंगलुरु | पू्र्व विदेश मंत्री और कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहे एसएम कृष्णा का सोमवार देर रात करीब 2:30 बजे निधन हो गया। वे 92 साल के थे। कृष्णा ने बेंगलुरु में अपने आवास पर अंतिम सांस ली। वे उम्र से जुड़ी बीमारियों से जूझ रहे थे। उनका पार्थिव शरीर मंगलवार को मद्दुर ले जाया जाएगा।
कर्नाटक सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री के निधन पर 3 दिन का राजकीय शोक घोषित किया है। इस दौरान राज्य में कोई समारोह या जश्न नहीं मनाया जाएगा। उनका अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।
निर्दलीय विधायक से विदेश मंत्री तक रहे, 2017 में कांग्रेस छोड़कर BJP जॉइन की
एसएम कृष्णा का जन्म 1 मई, 1932 को कर्नाटक के मांड्या जिले के सोमनहल्ली में हुआ था। उन्होंने मैसूर के महाराज कॉलेज ग्रेजुएशन किया और फिर गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से LLB की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने अमेरिका की साउथेन मॉडलिस्ट कॉलेज यूनिवर्सिटी से दोबारा ग्रेजुएशन किया। इतना ही नहीं वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी से लॉ की पढ़ाई भी दोबारा की। भारत वापस आकर कृष्णा कर्नाटक और दिल्ली हाईकोर्ट वकालत करने लगे। कुछ समय बाद वे राजनीति में आ गए।
निर्दलीय विधायक बना आधुनिक कर्नाटक का जनक
कृष्णा ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत एक निर्दलीय विधायक के रूप में की थी। वे 1962 विधानसभा चुनाव में मद्दुर सीट से चुने गए थे। इसके बाद वे प्रजा सोशलिस्ट पार्टी (PSP) से जुड़ गए। हालांकि, अगले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के एमएम गौड़ा से हार गए।
मांड्या लोकसभा सीट के सांसद की मृत्यु के बाद 1968 में उपचुनाव हुए। कृष्णा पहली बार सांसद चुने गए। 1971 में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीते। इमरजेंसी के बाद 1977 में हुए लोकसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
हालांकि, तीन साल बाद हुए मध्यावधि चुनाव में कृष्णा ने मांड्या सीट पर फिर से जीत दर्ज की। इसके बाद 1983 में इंदिरा सरकार में उद्योग राज्यमंत्री बने। राजीव गांधी ने उन्हें अपनी सरकार में वित्त राज्यमंत्री बनाया।
वे 1989 में कर्नाटक विधानसभा के अध्यक्ष और 1993 में उपमुख्यमंत्री बने। उन्हें 1999 में कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया। कृष्णा 11 अक्टूबर, 1999 से 28 मई, 2004 तक कांग्रेस से कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहे। उन्हें आधुनिक कर्नाटक का जनक भी कहा जाता है।
इसके बाद दिसंबर, 2004 से मार्च, 2008 तक महाराष्ट्र के राज्यपाल रहे। कृष्णा 2009 से 2012 तक मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली UPA सरकार में विदेश मंत्री रहे। कृष्णा 2017 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा से जुड़ गए थे। 2023 में उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था।