चंडीगढ़ | चंडीगढ़ के बाहरी इलाके में पुलिस प्रशासन, नशीली दवाओं, नशा तस्करी के बढ़ते कारोबार पर लगाम लगाने में फेल साबित हो चुका है, चंडीगढ़ युवा दल के प्रधान विनायक बांगिया और संयोजक सुनील यादव ने शहर के बाहरी इलाके में बढ़ रहे नशे के कारोबार और नशा तस्करी पर सख्ती के लिए प्रशासक को पत्र लिख पुलिस विभाग की कारगुजारियों पर सवाल खड़े करे है पत्र में कहाँ गया है की पुलिस विभाग केवल कागजी कार्रवाई तक समिति रह गया है और खानापूर्ति के लिए नाममात्र कार्रवाई कर नशे को रोकने मे पूर्णत: नाकाम साबित हो चुका है, शहर में चिट्टा-समैक-कोकेन-निकोटिन हुक्का जैसे नशों ने जड़ें पकड़ ली हैं जिस कारण युवाओं को एक सुनियोजित रूप से नशे में धकेला जा रहा है। पुलिस के पास नशे को रोकने के लिए किसी प्रकार का कोई भी स्थायी हल नहीं है।
यादव का कहना है कि चंडीगढ़, पंजाब व हरियाणा से सटा हुआ बार्डर का क्षेत्र है जहां नशा कारोबारी धड़ले से नशीली दवा व नशा बेच रहे हैं, इसलिए उन्होंने नशा तस्करी को रोकने के लिए बॉर्डर एरियाज पर चंडीगढ़ पुलिस की परमानेंट नाकाबंदी का सुझाव दिया था लेकिन महीनों बीतने के बावजूद अब तक बार्डर एरियाज नशा कारोबारियों के लिए खुले हैं जिससे सरेआम नशे को इलाके में लेकर आया जा रहा है। सबसे ज्यादा जरूरत शहर में आने वाली गाड़ियों की गहनता से चेकिंग की है।
बांगिया का आरोप है कि अब तक पुलिस किसी बड़े नामी नशा कारोबारी को पकड़ नहीं पाई है उन्होंने कहा कि अनेकों बार एसएसपी व संबंधित अधिकारियों से नशा रोकने की मांग करते आ रहे हैं परंतु फिर भी शहर में नशा कारोबारी नशे को कही छुप कर नहीं बल्कि सरेआम बेच रहे हैं।