Sunday, 18 October 2026
BREAKING
• एमएसएमई क्षेत्र के लिए सुरक्षित भविष्य है नेशनल पेंशन सिस्टम योजना • एवरेस्टबीकेसीसी सीज़न 8 की राष्ट्रीय यात्रा शिमला से शुरू • गुरुग्राम में इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम पर मारुति सीएसआर के तहत खर्च करेगी 75 करोड़ • अक्षय शर्मा को आशीर्वाद देने पहुंचे संत मलकीयत नाथ जी • स्वास्थ्य कर्मचारी बोले...ओल्ड पेंशन स्कीम हमारा हक, इसे लागू करे सरकार • इश्मिता होम्स ढकोली में निशुल्क आयुर्वेद चिकित्सा शिविर में 80 लोगों ने कराया स्वास्थ्य परीक्षण • गुरुग्राम में शुरू हुआ इको एशिया/इको इंडिया-2026 अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन • ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के विरोध में दो घंटे की हड़ताल कर गरजीं नर्सिंग ऑफिसर्स • दिग्गजों से मुलाकात ने बदले अक्षय शर्मा के लिए हल्का उत्तरी के समीकरण • मॉडल नहीं, यह टॉर्चर ट्रांसफर पॉलिसी, इसे रद्द करे सरकार

चंडीगढ़

सीओपीडी दुनिया भर में तीसरा सबसे बड़ा घातक रोग : डॉ सोनल

Updated on Tuesday, November 19, 2024 18:20 PM IST

चंडीगढ़ । क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) पर जागरूकता पैदा करने के लिए लिवासा अस्पताल मोहाली के डॉक्टरों की एक टीम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान फेफड़ों से संबंधित बीमारियों के बारे में विभिन्न तथ्यों और मिथकों पर प्रकाश डाला।

इस अवसर पर पल्मोनोलॉजी कंसल्टेंट डॉ. सोनल , पल्मोनोलॉजी सीनियर कंसल्टेंट डॉ. सुरेश कुमार गोयल, , इंटरनल मेडिसिन कंसल्टेंट डॉ. रंजीत कुमार गोन और डॉ जगपाल पंधेर उपस्थित थे। सीओपीडी और इसके उपचारों पर प्रकाश डालते हुए, पल्मोनोलॉजी कंसल्टेंट लिवासा हॉस्पिटल मोहाली, डॉ. सोनल ने कहा कि दुनिया भर में हार्ट प्रॉब्लम्स और कैंसर के बाद सीओपीडी तीसरा सबसे बड़ा घातक रोग है। बहुत से लोग सांस फूलने और खांसी को उम्र बढ़ने का सामान्य प्रभाव समझने की गलती करते हैं। बीमारी के शुरुआती चरणों में, आप लक्षणों को नोटिस नहीं कर सकते हैं। सीओपीडी सांस की तकलीफ के बिना वर्षों तक विकसित हो सकता है। आप रोग के अधिक विकसित चरणों में लक्षण देखना शुरू करते हैं। क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज फेफड़ों की बीमारी का एक प्रगतिशील रूप है जो हल्के से लेकर गंभीर तक होता है। यह सांस लेने में मुश्किल बनाता है। सीओपीडी  लगभग 63 मिलियन लोगों को प्रभावित करता है, जो दुनिया की सीओपीडी आबादी का लगभग 32% है।

डॉ. सुरेश कुमार गोयल ने कहा कि "सीओपीडी से एड्स, टीबी, मलेरिया और मधुमेह की तुलना में अधिक मौतें होती हैं। सीओपीडी अक्सर 40 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों में होता है जिनक धूम्रपान का इतिहास होता है। हर कोई नहीं, लेकिन सीओपीडी वाले अधिकांश व्यक्ति (उनमें से लगभग 90%) धूम्रपान करते हैं। सीओपीडी कार्यस्थल में रसायनों, धूल, धुएं या जैविक खाना पकाने के ईंधन के साथ लंबे समय से संपर्क में आने वाले लोगों में भी हो सकता है । यहां तक कि अगर किसी व्यक्ति ने कभी धूम्रपान नहीं किया है या विस्तारित अवधि के लिए प्रदूषकों के संपर्क में नहीं आया है, तब भी वे सीओपीडी विकसित कर सकते हैं।  'भारतीय में सीओपीडी का प्रसार लगभग 5.5 % से 7.55% है। हाल के अध्ययनों से पता चलता है कि सीओपीडी की व्यापकता दर पुरुषों में 22% और महिलाओं में 19% है।

Have something to say? Post your comment
एमएसएमई क्षेत्र के लिए सुरक्षित भविष्य है नेशनल पेंशन सिस्टम योजना

: एमएसएमई क्षेत्र के लिए सुरक्षित भविष्य है नेशनल पेंशन सिस्टम योजना

जियोपीसी से पढ़ाई के लिए कम खर्च में मिलेगा कंप्यूटर, एआई का भी कर सकेंगे इस्तेमाल

: जियोपीसी से पढ़ाई के लिए कम खर्च में मिलेगा कंप्यूटर, एआई का भी कर सकेंगे इस्तेमाल

वाहन पंजीकरण नंबरों की ई-नीलामी से 2.97 करोड़ रुपये का राजस्व

: वाहन पंजीकरण नंबरों की ई-नीलामी से 2.97 करोड़ रुपये का राजस्व

पंजाब चुनाव से पहले संत नामदेव समाज चंडीगढ़ में भरेगा हुंकार, एकजुटता का देगा संदेश

: पंजाब चुनाव से पहले संत नामदेव समाज चंडीगढ़ में भरेगा हुंकार, एकजुटता का देगा संदेश

इश्मिता होम्स ढकोली में निशुल्क आयुर्वेद चिकित्सा शिविर में 80 लोगों ने कराया स्वास्थ्य परीक्षण

: इश्मिता होम्स ढकोली में निशुल्क आयुर्वेद चिकित्सा शिविर में 80 लोगों ने कराया स्वास्थ्य परीक्षण

Haryanvi Film ‘Jo Lekh Likhe Ram Nai’ to Release on October 23

: Haryanvi Film ‘Jo Lekh Likhe Ram Nai’ to Release on October 23

नवरात्रि के दौरान जागरण एवं धार्मिक आयोजनों के लिए ध्वनि अनुमति की समय-सीमा बढ़ाने की मांग

: नवरात्रि के दौरान जागरण एवं धार्मिक आयोजनों के लिए ध्वनि अनुमति की समय-सीमा बढ़ाने की मांग

आर्कस्पायर में भावी वास्तुकारों ने रेलवे प्लेटफार्मों को किया री-डिजाइन

: आर्कस्पायर में भावी वास्तुकारों ने रेलवे प्लेटफार्मों को किया री-डिजाइन

पीएचडीसीसीआई ने किया यंग आर्किटेक्ट फोरम का गठन

: पीएचडीसीसीआई ने किया यंग आर्किटेक्ट फोरम का गठन

विकसित भारत-2047 के निर्माण में आर्किटेक्ट्स की अहम भूमिका: सतनाम सिंह संधू

: विकसित भारत-2047 के निर्माण में आर्किटेक्ट्स की अहम भूमिका: सतनाम सिंह संधू

X