नई दिल्ली,3 नवंबर ( न्यूज़ अपडेट इंडिया ) । सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी डीम्ड विश्वविद्यालयों को नियामक प्राधिकारियों की मंजूरी के बिना 2018-19 से दूरस्थ शिक्षा पाठ्यक्रम जारी रखने से रोक दिया है। साथ ही सर्वोच्च अदालत ने चार डीम्ड विश्वविद्यालयों को पिछली तारीखों से प्रदान की गई मंजूरियों की जांच भी केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) से कराने का आदेश दिया है। विभिन्न हाई कोर्टों के फैसलों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए जस्टिस आदर्श कुमार गोयल और जस्टिस यूयू ललित की पीठ ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) को भी आदेश दिया कि वह एक महीने के अंदर ऐसे संस्थानों को 'विश्वविद्यालय' शब्द का इस्तेमाल करने से रोके। अदालत ने कहा कि जब तक कैंपस से बाहर के केंद्रों या अध्ययन केंद्रों का वैधानिक अधिकारियों द्वारा व्यक्तिगत रूप से निरीक्षण न कर लिया जाए और उन्हें उपयुक्त न पाया जाए तब तक दूरस्थ शिक्षा के किसी भी पाठ्यक्रम को मंजूरी न प्रदान की जाए। अदालत ने निर्देश दिया कि चार डीम्ड विश्वविद्यालयों- विनायक मिशन रिसर्च फाउंडेशन; तमिलनाडु इलाहाबाद एग्रीकल्चर इंस्टीट्यूट; जेआरएन राजस्थान विद्यापीठ और इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस स्टडीज इन एजुकेशन, राजस्थान के छात्रों की शैक्षिक सत्र 2001-05 की डिग्रियां निलंबित रहेंगी।
चारों डीम्ड विश्वविद्यालयों को नीति विरुद्ध तरीके से पिछली तारीखों से मंजूरी प्रदान करने वाले यूजीसी अधिकारियों के खिलाफ सीबीआइ जांच का आदेश देते हुए पीठ ने कहा कि अपने वाणिज्यिक हितों के लिए अपनी स्थिति का दुरुपयोग करने वाले इन संस्थानों के आचरण की भी जांच कराई जाए। चारों संस्थानों को प्रदान मंजूरियों को गलत और गैरकानूनी बताते हुए अदालत ने कहा कि ऐसे संस्थानों के लिए तकनीकी शिक्षा के किसी भी पाठ्यक्रम को एआइसीटीई की मंजूरी के बिना शुरू करना न्यायोचित नहीं था।
सुप्रीम कोर्ट ने एआइसीटीई को निर्देश दिया कि वह ऐसे विद्यार्थियों के लिए परीक्षा का आयोजन करे जिनकी डिग्रियां 15 जनवरी, 2018 तक निलंबित कर दी गई हैं। इन विद्यार्थियों को परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए दो से ज्यादा अवसर प्रदान नहीं किए जाएंगे। अगर विद्यार्थी निर्धारित समय में परीक्षा उत्तीर्ण करने में असफल रहे तो उनकी डिग्रियां निरस्त हो जाएंगी।
साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि जो विद्यार्थी इस विकल्प का लाभ नहीं उठाना चाहते, उन्हें मांगे जाने के एक महीने के भीतर उनके द्वारा जमा की गई पूरी ट्यूशन फीस और अन्य शुल्क लौटा दिए जाएं। अदालत ने यह भी कहा कि चारों डीम्ड विद्यालयों को ऐसे विद्यार्थियों की पूरी ट्यूशन फीस और अन्य शुल्क हर हाल में 31 मई, 2018 तक लौटाने होंगे। जाहिर है कि अपना पैसा वापस लेने वाले विद्यार्थियों की डिग्रियां स्वत: ही निरस्त हो जाएंगी।