चंडीगढ़ । भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य व हिमाचल प्रदेश भाजपा के सह प्रभारी संजय टंडन की माता स्व. बृजपाल टंडन की आत्मा की शांति हेतु चंडीगढ़ क्लब में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया जिसमें पंजाब के राज्यपाल व चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया सहित हजारों लोगों ने उन्हें पुष्प सुमन अर्पित किये और दिवंगतआत्मा की शान्ति के लिए प्रार्थना की और टंडन परिवार को इस दुःख को सहने के लिए उनका ढांढ़स बंधवाया |
श्रद्धांजलि सभा में राज्यसभा सांसद सतनाम सिंह संधू व सिकंदर कुमार, राष्ट्रीय सेवक संघ के श्रीप्रेमजी गोयल, त्रिलोकी नाथ गोयल व दीपक बत्रा, चंडीगढ़ प्रशासक के सलाहकार राजीव वर्मा, ब्रह्म कुमारी प्रमुख पूनम दीदी, स्वामी सम्पूर्णानन्द महाराज, दिव्या ज्योति जागृति से स्वामी गुरु कृपानंद , पूर्व सांसद, अविनाश राय खन्ना, विजय सांपला, न्यायाधीश लीज़ा गिल, पंकज जैन, हरकेश मनुजा, रिटायर्ड जस्टिस सुधीर मित्तल, और रिटायर्ड जस्टिस एसएस सारन चंडीगढ़ भाजपा अध्यक्ष जितेंद्र पाल मल्होत्रा, पूर्व मेयर व पूर्व चंडीगढ़ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष कमला शर्मा व अरुण सूद, अखिल भारतीय ब्राह्मण सभा अध्यक्ष वीरेश शांडिल्य, हिमाचल प्रदेश के पूर्व मंत्री राजीव सेजल, पूर्व विधायक परमजीत पम्मी व विजय अग्निहोत्री, मेयर कुलदीप टीटा , चंडीगढ़ सांसद मनीष तिवारी, जनरल वीपी मलिक, भाजपा नेता सोम प्रकाश, पूर्व हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता सहित विभिन्न धार्मिक व सामाजिक संस्थाओं के साथ साथ विभिन्न राजनैतिक दलों के लोगों सहित पार्टी के हजारों कार्यकर्ताओं ने पुष्प सुमन अर्पित किये । इससे पूर्व कई गणमान्य व्यक्ति हिमाचल प्रदेश के ऊना विधायक सतपाल सत्ती, सांसद सुरेश भरद्वाज ने संजय टंडन के निवास पर जाकर दिवंगत आत्मा को श्रद्धासुमन अर्पित किये थे ।
इस शोक सभा में संजय टंडन के अनुज पुत्र सत्यम टंडन ने अपनी दादी के प्रिय भजन गाकर उनको समर्पित किया । अपनी माँ की बातों को याद करते हुए आज संजय टंडन भाव विभोर हुए और नम आँखों से उन्होंने कहा कि माँ बाप का घर पर होना बहुत बड़ी बात होती है । पहले पिता अब माँ का साया भी सर से उठ गया। वो प्रतिदिन सुबह सुबह माँ के साथ उनके कक्ष में चाय पीने जाते और फिर खूब बात करते । माँ ने भी बड़े चाव से सर पर हाथ फेरना और सहज भाव से मेरी किसी भी समस्या को हल करना और सलाह देना अब ऐसा कभी नहीं हो पायेगा ।
उन्होंने अपने जीवन काल में बहुत उतार चढ़ाव देखे । आपातकाल में तो मानो उनपर पहाड़ सा टूटा | पिता जी को जेल में डाला गया और माँ ने हम सभी भाई बहनो को पाला और सरकार के आगे घुटने नहीं टेके | उनकी ये हिम्मत सभी के लिए हमारे जीवन का एक अनमोल सीख बनी और हम सभी को भी दुःख की घड़ी में पूरी ताकत के साथ लड़ना सिखाया | उन्होंने पूरे परिवार को एकसाथ जोड़े रखा और छोटे व् बड़ों को प्यार से रखा | उन्होंने एक बात स्मरण करते हुए आँखे भरी कि मेरी पोतियां भी ये समझती हैं कि अगर मेरी डांट से उन्होंने बचना होता था तो वो माँ के पास जाकर छुप जाती थी क्योंकि माँ के आगे तो मैं बोल नहीं सकता | हम सभी को उनकी कमी जीवन भर खलेगी |