नई दिल्ली,31 अक्तूबर ( न्यूज़ अपडेट इंडिया ) । मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को सीबीर्आ ने व्यापम मामले में क्लीनचिट दे दी है। मंगलवार को भोपाल की अदालत में पेश रिपोर्ट में सीबीआइ ने साफ कहा है कि हार्ड डिस्क से 15 जुलाई 2013 के बाद कोई छेड़छाड़ नहीं हुई है। सीबीआइ ने यह भी कहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह व एक अन्य व्यक्ति द्वारा दिल्ली हाई कोर्ट और सीबीआइ को सौंपी गई दो पेन ड्राइव झूठे दस्तावेजों के आधार पर तैयार की गई थीं। भोपाल अदालत में सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश एससी उपाध्याय की अदालत में मंगलवार को पीएमटी 2013 के मामले में 490 आरोपियों के खिलाफ सीबीआइ ने चालान पेश किया। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर व्यापम मामले में हार्ड डिस्क में छेड़छाड़ को लेकर हुई सुनवाई की रिपोर्ट भी भोपाल की अदालत में पेश की गई। सीबीआइ ने हार्ड डिस्क छेड़छाड़ मामले में कहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और एक अन्य द्वारा दिल्ली हाई कोर्ट और सीबीआइ को जो दो पेन ड्राइव दी गई थीं, उनमें सीएम शब्द जोड़ने के तथ्य को हैदराबाद की सीएफएसएल ने 18 जुलाई 2013 को जोड़ा जाना पाया है।
इस तरह सीबीआइ ने दो पेन ड्राइव को झूठे दस्तावेजों के आधार पर बनाने की बात कही है। इधर, सीबीआइ ने पीएमटी 2013 के मामले में जिन 490 आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया है, उनमें व्यापम के तीन अधिकारी, तीन रैकेटियर, 17 बिचौलिए, 297 सॉल्वर और 170 वे अभिभावक हैं, जिनके बच्चों को परीक्षा में फायदा हुआ है। उधर, कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता केके मिश्रा ने सीएम शिवराज सिंह चौहान को सीबीआइ द्वारा क्लीनचिट दिए जाने के मामले में कहा है कि यह सुप्रीम कोर्ट की अवमानना है।
सीबीआइ को बीच में ही बदलने पड़े थे वकील
सीबीआइ ने व्यापमं से जुड़े मामलों की पैरवी के लिए अधिवक्ताओं की भर्ती की थी, लेकिन ट्रायल पूरा होने से पहले ही सीबीआइ को अपने अधिवक्ताओं को बदलना पड़ा था। सबसे पहले बीके कुलश्रेष्ठ को हटाकर मनोज भार्गव को जिम्मेदारी सौंपी गई थी, लेकिन मनोज भार्गव भी ज्यादा दिन पैरवी नहीं कर पाए और उनकी जगह दिल्ली से अधिवक्ता तैनात कर दिए गए। बीच-बीच में सीबीआइ मुख्यालय से अधिकारी फीडबैक लेने आ रहे थे और उन्होंने न्यायाधीश से भी बातचीत की थी। कोर्ट ने अधिवक्ताओं की पैरवी से संतुष्टी नहीं जताई थी।