श्रीनगर | जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में आतंकियों और सुरक्षाबलों के बीच एक बार मुठभेड़ शुरू हो गई है। भारतीय सेना की चिनार कोर ने शनिवार को इसकी जानकारी दी।
चिनार कोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि सेना को कुपवाड़ा के गोगलधर में आतंकियो के छिपे होने का इनपुट मिला था। इसके बाद सर्च ऑपरेशन चलाया गया। इस दौरान आतंकियों ने सुरक्षाबल पर गोलीबारी शुरू कर दी। सुरक्षाबलों ने भी जवाबी कार्रवाई की। फिलहाल ऑपरेशन जारी है। 3 से 4 आतंकियों के छिपे होने की आशंका है।
3-4 आतंकियों के छिपे होने की आशंका, 6 दिन पहले कठुआ में एक टेररिस्ट मारा गया था
इससे पहले 29 सितंबर को कठुआ जिले में बिलावर तहसील स्थित कोग-मंडली में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ हुई थी। इसमें एक आतंकी मारा गया था। 28 सितंबर को इसी मुठभेड़ में हेड कॉन्स्टेबल बशीर अहमद शहीद हो गए थे।
कुलगाम में 2 आतंकी ढेर, 5 सुरक्षाकर्मी घायल
कुलगाम के आदिगाम देवसर इलाके में भी शनिवार, 28 सितंबर को एनकाउंटर हुआ। इसमें सुरक्षाबलों ने दो आतंकियों को मार गिराया। गोलीबारी में सेना के 4 जवान और कुलगाम के ASP घायल हुए।
साउथ कश्मीर के DIG जाविद इकबाल मट्टू ने भास्कर को बताया कि आदिगाम एनकाउंटर में मारे गए दोनों आतंकियों की पहचान हो गई है। इनमें एक आतंकी आकिब अहमद शेरगोजरी बडगाम के चडूरा का रहने वाला है। दूसरा आतंकी उमैस वानी है, जो कुलगाम के ही चावलगाम का रहने वाला है। दोनों आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के लिए काम करते थे।
पुलवामा में 27 सितंबर को जैश-ए-मोहम्मद के 6 सहयोगी गिरफ्तार हुए थे
पुलिस ने शुक्रवार, 27 सितंबर को पुलवामा के अवंतीपोरा में टेरर मॉड्यूल का खुलासा किया था। पुलिस ने जैश-ए-मोहम्मद के 6 आतंकी सहयोगियों को गिरफ्तार कियाI ये युवाओं को आतंकवाद की ट्रेनिंग देते थे। इनके पास से 5 IED, 30 डेटोनेटर, IED की 17 बैटरी, 2 पिस्टल, 3 मैगजीन, 25 राउंड, 4 हैंड ग्रेनेड और 20 हजार कैश बरामद हुआ।
पुलिस ने बताया कि उन्हें जानकारी मिली थी कि जैश-ए-मोहम्मद के पाकिस्तान स्थित कश्मीरी आतंकी उन युवाओं की तलाश में हैं, जिनका ब्रेन वॉश किया जा सकता है। जांच में सामने आया कि आतंकी ने जेल में एक ओवर ग्राउंड वर्कर की मदद से कई युवाओं की पहचान की, जिन्हें अवंतीपोरा के त्राल क्षेत्र में आतंकवाद में शामिल होने के लिए प्रेरित किया गया था।
पुलिस के मुताबिक, पाकिस्तान के आतंकी हैंडलर ने इन युवाओं की मदद से IED लगाने के लिए कुछ जगहों को सिलेक्ट भी कर लिया था। हैंडलर ने IED बनाने के लिए उन युवाओं को पैसे भी दिए थे, जिससे वे इसके लिए सामान ला सकें।
युवाओं को पिस्तौल, ग्रेनेड भी दिए गए थे। युवाओं को टारगेट किलिंग, सुरक्षाबलों, सार्वजनिक जगहों, गैर कश्मीरी मजदूरों पर ग्रेनेड फेंकने और IED ब्लास्ट करने जैसी टेररिस्ट एक्टिविटी को अंजाम देने का निर्देश दिया गया था।