नई दिल्ली | मैसूर अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी मामले में कर्नाटक के CM एस सिद्धारमैया के खिलाफ FIR होने के बावजूद कांग्रेस नेतृत्व ने फैसला लिया है कि उन्हें पद से नहीं हटाएंगे। पार्टी का मानना है कि यह कर्नाटक में कांग्रेस सरकार को अस्थिर करने के लिए केंद्र की भाजपा सरकार की चाल है, लिहाजा इसका राजनीतिक स्तर पर ही जवाब दिया जाएगा।
दिलचस्प यह है कि कांग्रेस हाई कमान ने इस निर्णय पर पहुंचने के लिए अपने विरोधियों द्वारा अपनाए जा रहे मॉडलों का ही सहारा लिया है। सूत्रों के अनुसार, कर्नाटक को लेकर हुई अनौपचारिक बैठकों में पूरे मामले पर गौर करते समय हाल ही में दिल्ली के राजनीतिक घटनाक्रम पर बातचीत हुई। पार्टी में यह राय सामने आई कि दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने जेल जाने के बावजूद मुख्यमंत्री पद नहीं छोड़ा था।
केजरीवाल व भाजपा की मिसाल दी, MUDA घोटाले में ED ने केस दर्ज किया है
सिद्धारमैया ने MUDA मामले में ED के मनी लॉन्ड्रिंग केस दर्ज करने पर भी सवाल उठाए। सिद्धारमैया ने कहा कि ED ने किस आधार पर केस दर्ज किया है। यह मामला मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा नहीं है, क्योंकि हमें जमीन के बदले जमीन मुआवजे के तौर पर दी गई थीं। सिद्धारमैया ने कहा कि उनके खिलाफ बदले की राजनीति हुई है।
दरअसल, ED ने 30 सितंबर को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, उनकी पत्नी, साले और अन्य के खिलाफ FIR दर्ज की थी। इससे पहले मैसूरु लोकायुक्त ने 27 सितंबर को सभी के खिलाफ केस दर्ज किया था। लोकायुक्त ने 1 अक्टूबर से मामले की जांच शुरू कर दी है।
कांग्रेस ने बृजभूषण शरण सिंह का उदाहरण दिया
पार्टी नेताओं का यह भी कहना है कि भाजपा भी अपने किसी नेता के संदेह के दायरे में आने के बावजूद उसके खिलाफ कार्रवाई करने से बचती है। इस संदर्भ में भाजपा नेता बृजभूषण शरण सिंह की भी मिसाल दी गई, जिनके खिलाफ दिल्ली पुलिस में एफआईआर होने पर भी पार्टी ने कोई कार्रवाई नहीं की थी। हाई कमान को लगता है कि यदि सिद्धारमैया के खिलाफ कोई एक्शन लिया गया तो इसे भाजपा अपनी जीत के तौर पर पेश करेगी।
विधायक दल भी पूरी तरह सीएम के साथ
पार्टी के एक नेता ने बताया कि कर्नाटक विधायक दल भी पूरी तरह मुख्यमंत्री के साथ है। अक्सर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर निगाह रखने वाले डीके शिवकुमार खेमे ने भी चुप्पी साथ रखी है। वजह यह भी है कि शिवकुमार भी केंद्रीय एजेंसियों के निशाने पर हैं।
पार्टी सूत्रों ने कहा, आम चुनाव के नतीजे के बाद केंद्र में भाजपा कमजोर विकेट पर है और कर्नाटक में बैकफुट पकड़कर कांग्रेस उसे अपने ऊपर हावी नहीं होने देगी।
सिद्धारमैया पार्टी के बड़े ओबीसी फेस, महाराष्ट्र-झारखंड चुनाव पर भी नजर
सिद्धारमैया के रहते कर्नाटक में जातीय गणित कांग्रेस के हक में है और पार्टी नेतृत्व परिवर्तन का जोखिम नहीं लेना चाहती है। हरियाणा के चुनाव चल रहे हैं। महाराष्ट्र और झारखंड में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में पार्टी बैकवर्ड वोट की नाराजगी नहीं लेना चाहती।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के करीबी नेता ने कहा, सिद्धारमैया पार्टी के बड़े ओबीसी फेस के तौर पर उभरे हैं। जातीय जनगणना की जोरशोर से मांग कर रही कांग्रेस उन्हें हटाकर ओबीसी राजनीति को पटरी से नहीं उतारना चाहती।
CM सिद्धारमैया की पत्नी लौटा रहीं 14 प्लॉट
मैसूरु अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती बी. एम. की तरफ से लौटाए 14 प्लॉट वापस लेने को तैयार हो गई है। पार्वती ने लेटर लिखकर प्लॉट लौटाने की बात कही थी। इसके बाद MUDA ने कहा था कि वे इसे वापस लेने से पहले कानूनी सलाह लेंगे, क्योंकि मामला जांच के दायरे में है।
वहीं, CM सिद्धारमैया ने पत्नी के जमीन लौटाने के फैसले पर हैरानी जताई। उन्होंने कहा कि मेरे खिलाफ चल रहे राजनीतिक षड्यंत्र से आहत होकर मेरी पत्नी ने प्लॉट वापस करने का फैसला लिया है। सिद्धारमैया ने कहा कि पत्नी के इस फैसले से मैं हैरान हूं। मेरी पत्नी ने मेरी चार दशक लंबी राजनीति में कभी हस्तक्षेप नहीं किया। वह मेरे खिलाफ नफरत की राजनीति का शिकार हुई है और मेंटल टॉर्चर झेल रही है।
CM की पत्नी बोलीं- राजनीतिक परिवारों की महिलाओं को विवाद में न घसीटें
30 सितंबर को ED के केस दर्ज करने के कुछ घंटों बाद CM सिद्धारमैया की पत्नी बीएन पार्वती ने MUDA को मुआवजे में मिली जमीन लौटाने की पेशकश की थी। बीएन पार्वती ने MUDA कमिश्नर को लेटर लिखा, जिसे CM कार्यालय ने देर रात शेयर किया।