चंडीगढ़,26 अक्तूबर ( न्यूज़ अपडेट इंडिया ) । पंजाब एवं चंडीगढ़ में भी हजारों श्रद्धालुओं ने छठ महापर्व मनाया। लोगों ने शुक्रवार सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य दिया और उनका पूजन किया। इसके साथ ही पांच दिनों के इस महापर्व का समापन हो गया। चंडीगढ़ सहित विभिन्न स्थानों पर भारी संख्या में बिहार और पूर्वांचल के लोगो ने सरोवरों, नहरों और नदियों के किनारे छठ पूजा की। वीरवार को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया गया था।
छह पूजा के लिए सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम किए गए थे। चंडीगढ़ में श्रद्धालुओं ने सेक्टर 42 की झील सहित विभिन्न स्थानों पर छठ पूजा की। सेक्टर 42 में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने उगते सूर्य की पूजा की और अर्घ्य दिया। यहां बनाए गए घाटों को बहुत सुंदर तरीके से सजाया गया था। रोशनी की भी अच्छी व्यवस्था की गई थी।
श्रद्धालु तड़के चार बजे से ही छठ पूजा के लिए बनाए गए घाटों पर पहुंच गए। घाटों पर श्रद्धालुओं का मेला लगा था। महिलाएं छठ पूजा के गीत गा रही थीं। व्रती सूर्यदेव के निकलने से कई घंटें पहले ही पानी में खड़ी हो गईं। इसके बाद सूर्य के उगते ही उनकाे जल और दूध कर अर्घ्य दिया गया। चंडीगढ़ के पास के जीरकपुर में लोगों ने घग्गर नदी के किनारे बनाए गए घाटों पर छठ पूजा की आैर उगते सूर्य को अर्घ्य दिया।
पंजाब के लुधियाना, जालंधर, अमृतसर, बठिंडा और पटियाला सहित विभिन्न शहरों में रह रहे पूर्वांचल के लोगों ने नदियों, सरोवरों और तालाबों के किनारे छठ महापर्व मनाया और उगते सूर्य को अर्घ्य दिया। महिलाएं इस माैके पर मंगलगीत और छठ पूजा के गीत गा रही थीं। सभी जगहों पर पूजन के लिए नदियों, सरोवरों और तालाबों के किनारे पर घाटों को बहुत सुंदर ढ़ंग से सजाया गया था। घाटों पर लोग तड़के ही पहुंच गए थे। वहां रोशनी की भी खास व्यवस्था की गई थी।
छठ पूजा के अवसर पर अधिकतर जगहों पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। वीरवार शाम से ही कई जगहों पर गीत संगीत के कार्यक्रम हुए और लोगों ने इनका खूब आनंद लिया। शुक्रवार सुबह में उगते सूर्य की पूजा और उनको अर्घ्य देने के साथ इस महापर्व का समापन हो गया। छठ पूजन के लिए श्रद्धालु विभिन्न तरीके के पकवान बनाते हैं और व्रती चार दिनों का उपवास रखते हैं।