चंडीगढ़ ,26 अक्तूबर ( न्यूज़ अपडेट इंडिया ) : रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी को लीज होल्ड से फ्री होल्ड कन्वर्जन शुरू किए जाने के बाद भी लोगों की मुश्किलें कम होने वाली नहीं हैं। शहर की बहुत सी हाउसिंग सोसायटीज को अभी इसका फायदा नहीं मिलेगा। इसका कारण यह है कि इन सोसायटीज ने प्रशासन से जमीन अपने नाम ट्रांसफर ही नहीं करवा रखी है। ज्यादातर ने प्रशासन से ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट (ओसी) भी नहीं ले रखा है। बिल्डिंग कोड के हिसाब से सोसायटी बनाई गई और यह रहने लायक है, यही प्रमाणित करने के लिए ओसी लेना होता है। चंडीगढ़ के सेक्टर-48, 49, 50 और 51 में कुल 112 ग्रुप हाउसिंग सोसायटीज हैं। जिनमें जमीन केवल 10 सोसायटीज के नाम ही हैं जबकि 35 सोसायटीज की जमीन फ्री होल्ड है। बाकी बची सोसायटीज की जमीन लीज होल्ड है।
लीज से फ्री होल्ड शुरू होने का फायदा उठाने से पहले सोसायटी को जमीन अपने नाम ट्रांसफर करानी होगी। इसके लिए प्रशासन को फीस भी अदा करनी होगी। पिछले साल फरवरी में प्रशासन ने हाउसिंग सोसायटी के फ्लैट, हाउसिंग यूनिट के शेयर्स ट्रांसफर करने की गाइडलाइंस जारी की थी। स्टैंप ड्यूटी अदा करने के बाद कन्वेंस डीड या लीज डीड के बाद ही सोसायटी की जमीन उसके नाम ट्रांसफर हो सकती है। चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड और यूटी प्रशासन को यह स्टैंप ड्यूटी चुकानी होती है। पॉलिसी बनने के बाद से अब तक किसी भी सोसायटी ने जमीन अपने नाम ट्रांसफर नहीं करवाई है।
ग्रुप हाउसिंग कोऑपरेटिव सोसायटीज वेलफेयर काउंसिल चेयरमैन सतीश चंद्र शर्मा ने बताया कि प्रशासन ने जो पॉलिसी बनाई है, वह अस्पष्ट है। कन्वेंस डीड के रेट भी स्पष्ट नहीं हैं। जमीन ट्रांसफर कराने के लिए स्टांप ड्यूटी भी कहीं ज्यादा लगती है।