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चंडीगढ़

शैल्बी हॉस्पिटल में रेज़ुम थेरेपी से प्रोस्टेट ग्रंथि का उपचार उपलब्ध

Updated on Tuesday, August 27, 2024 18:50 PM IST

चंडीगढ़ । प्रसिद्ध मूत्र रोग विशेषज्ञ और शैल्बी अस्पताल मोहाली में यूरोलॉजी सेवाओं के निदेशक डॉ. प्रियदर्शी रंजन ने कहा कि रेज़ुम थेरेपी  अब भारत में उपलब्ध है। उत्तर भारत में पहली बार, मोहाली के शैल्बी अस्पताल ने बिना सर्जरी के प्रोस्टेट ग्रंथि के इलाज के लिए रेज़ुम (जल वाष्प) थेरेपी नामक  तकनीक का उपयोग किया गया  है, जो पारंपरिक दो घंटे के ऑपरेशन की तुलना में बिना किसी जटिलता के 10 मिनट की प्रक्रिया है।

शैल्बी अस्पताल द्वारा आयोजित  संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए, डॉ. रंजन ने कहा कि प्रोस्टेट ग्रंथि पर पारंपरिक सर्जरी को 'ट्रांसयूरेथ्रल रिसेक्शन ऑफ द प्रोस्टेट' (टीयूआरपी) के रूप में जाना जाता है। मरीज को लगभग दो से तीन दिन तक अस्पताल में रहना पड़ता है। सर्जरी एक घंटे तक चलती है। इलाज के दौरान मरीजों को असहनीय दर्द सहना पड़ता है एवं  इसके अलावा, रोगी संभोग के बाद स्खलन करने की क्षमता खो देता है।

रेज़म थेरेपी के लाभों के बारे में बताते हुए, डॉ. रंजन ने कहा कि टीयूआरपी के समाधान के रूप में, शैल्बी अस्पताल एक क्रांतिकारी तकनीक लेकर आया ! रेज़ुम थेरेपी में, हम "वाटर वपूर थेरेपी" के साथ प्रोस्टेटिक ऊतकों के टुकड़ों को हटाकर प्रोस्टेट ग्रंथि को कोर करते हैं। इस प्रक्रिया में स्टीम इंजेक्शन की मदद से प्रोस्टेट ग्रंथि के बढ़े हुए हिस्से को गैर-सर्जिकल तरीके से गलना शामिल है।

डॉ रंजन ने कहा कि यह थेरेपी आमतौर पर एक डे केयर  प्रक्रिया है। यह लोकल एनेस्थीसिया की मदद से किया जाता है। यह प्रक्रिया लगभग 10 मिनट तक चलती है। मरीज को दो से चार घंटे बाद उसी दिन छुट्टी दे दी जाती है। एक छोटा कैथेटर पांच से सात दिनों तक रखा जाता है ।

कुछ हफ्तों में, रोगी के शरीर की प्राकृतिक उपचार प्रतिक्रिया उपचारित प्रोस्टेट ऊतक को अवशोषित कर लेती है, जिससे प्रोस्टेट सिकुड़ जाता है। इससे बढ़े हुए प्रोस्टेट ऊतक के कारण होने वाले अवरोधक लक्षणों में सुधार होता है। उन्होंने कहा कि अधिकांश रोगियों को दो सप्ताह में ही राहत महसूस होने लगती है और अधिकतम लाभ तीन महीने के भीतर हो सकता है।

 इरशाद खान, सीएओ शैल्बी अस्पताल ने कहा कि अस्पताल मोहाली ने डॉ. रंजन के नेतृत्व में अपनी यूरोलॉजी सेवाओं में प्रोस्टेट ग्रंथि के लिए रेज़्यूम उपचार को शामिल कर एक और मील का पत्थर हासिल कर लिया है। शैल्बी अस्पताल मोहाली में  किडनी प्रत्यारोपण, यूरोलिफ्ट और अन्य नियमित यूरोलोजी सर्जरी  नियमित रूप से की जाती है।

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