चंडीगढ़ ,22 अक्तूबर ( न्यूज़ अपडेट इंडिया ) : जेएनयू के छात्र कन्हैया कुमार ने रविवार को पंजाब कला भवन सेक्टर-16 में आयोजित अवतार जंडियालवी पुरस्कार समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि विश्व में पहचान बनाने के लिए राम मंदिर का निर्माण करके उसकी मूर्ति स्थापना करना नहीं है। बल्कि आम इंसान को बेहतर सुविधा देना है। आज जरूरी है कि हम इंसानों को बेहतर जीवन दें। हमारे अस्पतालों में ऑक्सीजन नहीं है, न ही हम इस पर बोलना चाहते हैं और न ही सोचना।
कन्हैया ने कहा कि साहित्य को समाज का दर्पण बोला जाता है जो गलत है। आज साहित्य समाज का चेहरा है। जिसे हम खुद ही बना रहे हैं और खुद ही बिगाड़ने रहे हैं। आज समाज पूंजीवादी लोगों के हाथों की कठपुतली बनकर रह गया है। आज साहित्य में किसी की आलोचना नहीं होती बल्कि हाफ गर्लफ्रेंड और फुल गर्लफ्रेंड पर चर्चा की जाती है। यदि कोई आलोचनात्मक साहित्य की तरफ बढ़ता भी है तो उसकी हत्या कर दी जाती है। जिसका जीता जागता उदाहरण गौरी लंकेश है।
कन्हैया ने कहा कि सोशल मीडिया पर चलने वाले साहित्य आज किसी को एक्सपोज करने का काम नहीं कर रहे, बल्कि महिलाओं के प्रति अश्लील मैसेज और उनका शोषण करने वाली बातों को पेश करते हैं। जब कभी भी सोशल मीडिया को खोला जाता है तो उस समय चुटकले ही दिखते हैं और वह भी महिलाओं पर आधारित होते हैं।
कन्हैया ने कहा कि विकास का नारा प्रधानमंत्री द्वारा बार-बार लगाया जाता है। कहा जाता है कि हम विकास की ओर बढ़ रहे हैं। यदि चंडीगढ़ में विकास की बात करें तो एक विकास ने रात को लड़की से छेड़छाड़ की थी और उसे तीन महीनों के बाद भी जमानत नहीं मिल रही है। दूसरा विकास गुजरात में हो रहा है। जहां अडानी और अंबानी हर प्रोजेक्ट को चला रहे हैं। विकास तो सिर्फ खोखला दावा है, इसके अंदर कुछ नहीं बचा। जो सत्ता बोलती है, वही साहित्यकार लिखता है।
कन्हैया ने कहा कि गुरमीत राम रहीम के मामले में पंचकूला में हिंसा होती है और प्रधानमंत्री टिवट्र पर कहते है कि हिंसा मत करो। हैरत की बात है कि वह टिवट्र किसके लिए था। पंचकूला, चंडीगढ़, पंजाब का आम आदमी तो इंटरनेट से ही कोसों दूर था तो इस मैसेज का क्या अर्थ। हनीप्रीत कई दिनों तक गुम रही। हर किसी ने उसे ढूंढ़ा, विकास कहां गया कोई नहीं जानता।
कन्हैया ने कहा कि आज साहित्य का अंत सार्वजनिक तौर पर हो चुका है। कुछ साहित्य देश की यूनिवर्सिटी में बचा है। जिसका परिणाम है कि पंजाब यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट्स पर लाठीचार्ज हुआ, बनारस यूनिवर्सिटी में छात्राओं का गलत के खिलाफ आवाज उठाने पर लाठीचार्ज हुआ। इसी प्रकार जेएनयू और दिल्ली यूनिवर्सिटी सहित देश की हर यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट्स के साथ हो रहा है। राजनीति करने वालों को स्टूडेंट्स से क्या फर्क पड़ता है। उन्हें उससे क्या डर है। वहीं, राजनीति पर उन्होंने कहा कि यह तभी होती है जब समाज में ऊंच-नीच, जात-पात और बड़े-छोटे का भेदभाव हो। यदि स्टूडेंट्स इसे खत्म कर देंगे तो पूंजीवादी नेताओं का अस्तित्व खत्म हो जाएगा।
कन्हैया ने कहा कि भ्रष्टाचार नीति में नहीं होता, बल्कि नीति में ही भ्रष्टाचार को हम पैदा कर रहे हैं। राजनीति का काम जिम्मेदारी है, उत्तरदायित्व है न कि लोगों की आपस में लड़ाई कराना। एक समय था जब हिमाचल प्रदेश के नेता सुखराम पर दूरसंचार का घोटाला, रीता बहुगुणा पर भ्रष्टाचार और मुम्बई के नारायण पर कड़े आरोप भाजपा ने ही लगाए थे लेकिन आज वही भाजपा उन लोगों को नेता बनाने की राह में चल रही है। इसके प्रति लोगों को जानने की जरूरत है। यह जरूरत एक साहित्यकार ही कर सकता है।