चंडीगढ़, 25 जून। कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं मुख्य प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने हरियाणा सरकार द्वारा धान पर मार्केट फीस की बढ़ोतरी करने और एचआरडीएफ फीस को बढ़ाने की तैयारी को किसान विरोधी फरमान बताते हुए भाजपा-जजपा सरकार से इस फैसले तो तुरंत वापिस लेने की मांग की है।
आज यहां जारी एक बयान में सुरजेवाला ने कहा कि गठबंधन सरकार ने 1509, मुच्छल, सरबती, 1121 सहित धान की सभी किस्मों पर मंडियों में मार्केट फीस और एचआरडीएफ को एक प्रतिशत से बढाकर चार प्रतिशत करने के फैसला किया है। सुरजेवाला ने कहा कि कोरोना काल में इस अदूरदर्शी फैसले से हरियाणा के किसान के धान को या तो अपनी फसल पड़ोसी राज्यों मंडियों में बेचनी पड़ेगी या उसे व्यापारियों को धान 100-150 रुपए प्रति क्विंटल सस्ता बेचना पड़ेगा।
सुरजेवाला ने कहा कि पिछले वर्ष प्रदेश में 42.5 लाख मीट्रिक टन बासमती और 1509 धान हुआ, जबकि 56 लाख मीट्रिक टन परमल हुआ, अब मार्केट फीस और एचआरडीएफ बढ़ाने से किसानों के अलावा मंडी के आढ़तियों, मुनीमों, मजदूरों और राइस मिलर्स सभी पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा, पर स्वाभाविक रूप से इस फैसले का सबसे ज्यादा बुरा प्रभाव किसानों पर पड़ेगा। किसान को या तो अपने धान को पंजाब-दिल्ली आदि पड़ोसी प्रदेशों में बेचना पड़ेगा, जिससे किसान को अपने समय के साथ-साथ दूसरे राज्यों में ट्रांसपोर्ट का खर्चा किसान को भी देना पड़ेगा, उसकी लागत बढ़ेगी।
सुरजेवाला ने कहा कि किसान अगर अन्य प्रदेशों की मंडियों में अपनी फसल बेचने के लिए जाते हैं, तो इससे उन्हें आर्थिक नुक्सान होगा बल्कि सरकार को भी राजस्व कम मिलेगा। हमारा धान पडोसी प्रदेशों में जाने से प्रदेश सरकार को उम्मीद के अनुसार टैक्स भी नहीं मिलेगा। प्रदेश में धान बेचने की स्थिति में व्यापारी देश या विदेश के खुले बाजार से मिलने वाली कीमतों में से बढ़ी हुई मार्केट और एचआरडीएफ फीस जो लगभग सौ से डेढ़ सौ रुपए प्रति क्विंटल आएगी को कम देंगे और उसकी वसूली किसानों से करेंगे, जिससे इस फैसले के अनुसार प्रदेश के किसानों पर लगभग 500-600 करोड़ का आर्थिक बोझ पड़ेगा।