चंडीगढ़, 13 फरवरी। हरियाणा के अस्तित्व में आने 54 साल बाद हरियाणा को अपने कानून मिलेंगे। मुख्य सचिव के नेतृत्व वाली कमेटी ने सभी कानूनी पहलूओं के आधार पर रिपोर्ट तैयार कर दी है। जिसे मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने मंजूरी प्रदान कर दी है।
शनिवार को हरियाणा विधानसभा के स्पीकर ज्ञान चंद गुप्ता ने मुख्यमंत्री तथा कानून विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक के बाद संसदीय कार्य विभाग को इस बारे में कार्रवाई के निर्देश जारी कर दिए हैं। विधानसभा में बजट सत्र के दौरान हरियाणा के नाम से कानून अस्तित्व में आ जाएंगे। पंजाब के नाम से चल रहे 163 कानूनों के नाम से ‘पंजाब’ शब्द हटा कर उसके स्थान पर ‘हरियाणा’ कर दिया जाएगा। बैठक में मुख्य सचिव विजय वर्धन, विधान सभा सचिव राजेंद्र कुमार नांदल और कानून एवं विधि विभाग की लीगल रिमेम्ब्रेन्सर बिमलेश तंवर भी मौजूद रहे।
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हरियाणा को विरासत में जो कानून मिले थे, वे सभी पंजाब के नाम पर थे और गत 54 वर्षों से हरियाणा की शासन व्यवस्था इन्हीं कानूनों के आधार पर चल रही है। इसके चलते प्रदेश की जनता और जनप्रतिनिधि इन कानूनों को हरियाणा के नाम पर करने की मांग करते रहे हैं। बैठक में दोनों अधिकारियों ने विधान सभा अध्यक्ष को बताया कि इस मामले में गठित समिति अपनी रिपोर्ट मुख्य सचिव के सम्मुख प्रस्तुत कर चुकी है।
इसके बाद यह रिपोर्ट मुख्यमंत्री मनोहर लाल के सामने प्रस्तुत की गई। इस रिपोर्ट पर मुख्यमंत्री अपनी मंजूरी दे चुके हैं, जिसके बाद विधेयक का मसौदा तैयार करने का रास्ता साफ हो गया है। अब प्रदेश सरकार का संसदीय कार्य विभाग इस रिपोर्ट के आधार पर विधेयक का मसौदा तैयार करेगा। गुप्ता ने बताया कि हरियाणा के कानूनों के शीर्षकों से ‘पंजाब’ शब्द हटाने के लिए विधेयक 5 मार्च से शुरू हो रहे विधान सभा के बजट सत्र में प्रस्तुत किया जा सकता है।
इस विधेयक के पास होने से करीब 163 कानूनों से पंजाब का नाम हट जाएगा। लीगल रिमेम्ब्रेन्सर ने विधान सभा अध्यक्ष से इस विधेयक के तकनीकी पहलुओं पर भी चर्चा की। लीगल रिमेम्ब्रेन्सर बिमलेश तंवर की अध्यक्षता में गठित इस कमेटी ने अपनी सिफारिशें मुख्य सचिव के माध्यम से मुख्यमंत्री के सम्मुख प्रस्तुत कीं। इस कमेटी ने 1968 के आदेश के अंतर्गत स्वीकृत अधिनियमों के उपशीर्षकों के संशोधन के विषय में पुनरावलोकन एवं परीक्षण किया है।
विधानसभा सचिवालय में आयोजित बैठक में इस मसले पर गंभीर मंत्रणा हुई। लीगल रिमेम्ब्रेन्सर ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश के अधिनियमों से ‘पंजाब’ शब्द के स्थान पर ‘हरियाणा’ करने में कोई भी कानूनी अड़चन आड़े नहीं आएगी। राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1966 के तहत हरियाणा को पूर्ण राज्य का दर्जा मिला है। उसे अपनी आवश्यकता अनुसार कोई भी नया कानून बनाने तथा राज्य से संबंधित किसी भी कानून में संशोधन का पूरा अधिकार है। लीगल रिमेम्ब्रेन्सर ने स्पष्ट किया कि हरियाणा विधान सभा को किसी भी अधिनियम के शीर्षक तथा उपशीर्षक में संशोधन करने की भी पूरी शक्ति है। इसके साथ ही मुख्य सचिव विजय वर्धन ने कहा कि ऐसा करने में कोई प्रशासनिक बाधा नहीं है।