कहा देवीलाल की विरासत मैं हूं रखवाला
26 तक कृषि कानून वापस नहीं हुए तो 27 से मान्य हो इस्तीफा
चंडीगढ़। केंद्र सरकार द्वारा कृषि कानून वापस नहीं लिए जाने के विरोध में इनेलो विधायक अभय चौटाला ने हरियाणा विधानसभा से इस्तीफा दे दिया है। अभय चौटाला ने अपना यह इस्तीफा 27 जनवरी से मान्य करने का आग्रह किया है। इनेलो विधायक इस समय ऐलनाबाद विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं।
अभय चौटाला ने करीब एक सप्ताह पहले सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान यह ऐलान किया था कि वह किसानों के हित में इस्तीफा देने से भी पीछे नहीं हटेंगे। विधानसभा में इस समय अभय चौटाला ही इनेलो के एक मात्र विधायक हैं। सोमवार को हरियाणा विधानसभा के स्पीकर ज्ञान चंद गुप्ता को लिखे पत्र में अभय चौटाला ने कहा है कि चौधरी देवीलाल ने हमेशा किसानों के लिए संघर्ष किया है। आज की परिस्थितियों में उसी विरासत का मैं रखवाला हूं।
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किसानों पर आए इस संकट की घड़ी में मेरा यह दायित्व है कि मैं हर संभव प्रयास करूं जिससे यह धरोहर सहजता से आने वाली पीढ़ी को जा सके ताकि किसानों के भविष्य और अस्तित्व पर आए खतरे को टाला जा सके। भारत सरकार द्वारा असंवैधानिक व अलोकतांत्रिक तरीके से पारित किए गए आवश्यक वस्तु अधिनियम कानून 2020 से मंडीकरण कानून 2020 और कांट्रैक्ट खेती कानून 2020 थे। जिनका विरोध देशभर में हो रहा है।
अभय चौटाला ने कहा कि इन कानूनों का देशभर में व्यापक विरोध और आंदोलन को अब तक 47 से भी अधिक हो गए हैं कड़ाके की ठंड में लाखों की संख्या में किसान दिल्ली को चारों तरफ से घेरे बैठे हैं। ठंड के कारण 60 से ज्यादा किसान शहीद हो चुके हैं। इस संबंध में सरकार द्वारा किसानों से औपचारिक वार्तालाप के आठ दौर हो चुके हैं परंतु सरकार ने इन तीनों काले कानूनों को वापिस लेने बारे कोई सहमति नहीं दर्शाई है।
सरकार ने जिस प्रकार की परिस्थितियां बनाई हैं उन्हें देखते हुए ऐसे नहीं लगता कि विधानसभा के एक जिम्मेवार सदस्य के रुप में मैं कोई ऐसी भूमिका इन परिस्थितियों में निभा सकूं। इस समय किसानों के हित सर्वोपरि हैं। एक संवेदनहीन विधानसभा में मेरी मौजूदगी कोई महत्व नहीं रखती है। इन सभी हालातों को देखते हुए यदि भारत सरकार इन तीन काले कानूनों को 26 जनवरी 2021 तक वापिस नहीं लेती है तो इस पत्र को विधानसभा से मेरा त्याग पत्र समझा जाए।