सरकारी स्कूलों के लिए खुशखबरी लाया कोरोना काल
डेढ लाख बच्चों ने निजी स्कूल छोड़ सरकारी में लिए दाखिले
ग्यारहवीं में हुए सर्वाधिक दाखिले
अब नई संख्या के अनुसार बनेगी नीति
चंडीगढ़। हरियाणा के सरकारी स्कूलों के लिए कोरोना काल बेहतर साबित हुआ है। इस अवधि के दौरान निजी स्कूलों में पढ़ाई कर रहे करीब डेढ लाख विद्यार्थियों ने सरकारी स्कूलों का रूख कर लिया है। जिसके पीछे सबसे बड़ा कारण निजी स्कूलों द्वारा ली जा रही फीस और सरकार द्वारा इस फीस के लिए कोई नियम नहीं बनाना है। सभी जिलों से एक रिपोर्ट चंडीगढ़ मुख्यालय को भेजी गई है। जिसके आधार पर आगामी शिक्षा सत्र की तैयारी की जाएगी।
हरियाणा में 23 मार्च 2020 को स्कूल बंद कर दिए गए थे।
जून माह के दौरान कोरोना केस बढऩे के कारण स्कूली विद्यार्थियों को घर बैठे ऑनलाइन पढ़ाई शुरू करवाई गई। जिसके बाद निजी स्कूलों ने फीस वसूलनी शुरू कर दी। इसे लेकर अभिभावकों तथा निजी स्कूल संचालकों के बीच विवाद शुरू हो गया। जिसके चलते प्रदेश में निजी स्कूलों में पढऩे वाले बच्चों ने सरकारी स्कूलों का रूख करना शुरू कर दिया। निजी स्कूलों ने जब एसएलसी नहीं दिया तो सरकार ने बगैर एसएलसी के ही दाखिले शुरू कर दिए।
(SUBHEAD)
परिणाम स्वरूप 31 दिसंबर तक हरियाणा के सरकारी स्कूलों में एक लाख 46 हजार 60 विद्यार्थी नए दाखिल हुए हैं। यह सभी निजी स्कूलों से आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना काल के दौरान 90 हजार 254 लडक़े तथा 55 हजार 806 लड़कियों ने निजी स्कूल छोडक़र सरकारी स्कूलों में दाखिला लिया है। शिक्षा निदेशालय द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट के मुताबिक 35 हजार 598 विद्यार्थी 11वीं कक्षा में दाखिल हुए हैं। इसके अलावा 14 हजार 658 नौवीं तो 14 हजार 248 छठी कक्षा में आए हैं।
शिक्षा विभाग का मानना है कि यह पिछले वर्षों की तुलना में आठ फीसदी अधिक है। शिक्षा विभाग का मानना है कि राज्य में 136 नए राजकीय संस्कृति मॉडल वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों की स्थापना तथा नई शिक्षा नीति के लागू होने से अगले सत्र के दौरान सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या में और वृद्धि हो सकती है। इस रिपोर्ट के आधार पर सरकारी स्कूलों द्वारा नए शिक्षा सत्र की तैयारी की जाएगी।