हरियाणा सरकार ने पंचकूला में अर्बन एरिया डेवलेपमेंट एक्ट का सैक्शन-7ए लागू कर दिया है। जिससे पंचकूला जिले के 212 गावों में छोटे प्लाटों अथवा भू-खंडों की रजिस्ट्रीयां बंद हो गई हैं। इससे आम लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के फैसले के कारण सबसे अधिक मध्यमवर्गीय परिवार प्रभावित हो रहे हैं।
सरकार द्वारा सैक्शन-7ए लागू करने के बाद राजस्व विभाग की ओर से टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग को पत्र लिखकर साफ कर दिया है कि एक एकड़ से अधिक की भूमि के रजिस्ट्रेशन में भी गोलमाल हो सकता है। सैक्शन-7ए लागू होने के बाद एक एकड़ से कम जमीन का पंजीकरण बिना टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग की एनओसी (अनापत्ति प्रमाण-पत्र) के बिना नहीं हो सकता। ऐसे में पिंजौर, कालका, रायपुररानी, बरवाला, मोरनी रोड सहित कई इलाकों में छोटे प्लाटों का रजिस्ट्रेशन ही रुक गया है।
यह मामला मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर तक भी पहुंच चुकाहै। प्रभावित गांवों के लोगों द्वारा विधानसभा स्पीकर के समक्ष गुहार लगाए जाने के यह मामला मुख्यमंत्री मनोहर लाल के दरबार में पहुंच चुका है। इधर, एफसीआर यानी रेवेन्यू सेक्रेटरी संजीव कौशल ने टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के प्रधान सचिव एके सिंह को पत्र लिखा है। पत्र में आशंका जताई गई है कि सैक्शन-7ए के तहत एक एकड़ से कम की रजिस्ट्री का तोड़ निकाला जा सकता है।
कालका तहसील के 58 गांव न्यू पंजाब कैपिटल पैराफेरी कंट्रोल एक्ट-1953 से खासे तंग हैं। यह एक्ट इन गांवों पर लगा होने की वजह से काफी दिक्कत लोगों को आती है। शिवालिक विकास मंच के अध्यक्ष विजय बंसल का कहना है कि इस बारे में कई बार सरकार को पत्र लिखा गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अब मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में लंबित है।
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दो राजनीतिक परिवारों की लड़ाई में जनता का नुकसान
पंचकूला जिले के 212 गावों में जमीनों की रजिस्ट्री नहीं होने के पीछे राजनीतिक विवाद है। सूत्रों के अनुसार हरियाणा के एक नेता की कालका तहसील के अंतर्गत आने वाले चिक्कन गांव के साथ में ही बसे चैपहर गांव में 120 बीघा के करीब जमीन है।
इसके साथ ही वन एवं वन्य जीव विभाग का गिद्द प्रजनन केंद्र भी है। इसे ईको सेंसेटिव जोन घोषित किया हुआ है। इस जमीन पर प्लॉटिंग करके फार्म हाउस विकसित करने की योजना बनाई गई। इसके लिए बाकायदा प्लॉटों की खरीदो-फरोख्त भी शुरू हो गई। इसी दौरान सरकार में बैठक एक वरिष्ठ मंत्री ने इस पर रोक के लिए सैक्शन-7ए लागू करवा दिया।
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