किसानों से टकराव का रास्ता छोड़ सरकार रद्द करने कृषि कानून : अरोड़ा
चंडीगढ़, 15 दिसम्बर । हरियाणा के पूर्व स्पीकर व मंत्री तथा वरिष्ठ कांग्रेस नेता अशोक अरोड़ा ने सरकार को नसीहत दी है कि किसानों से टकराव का रास्ता छोड़कर सरकार तुरंत तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करे। इन तीन बिलों का ड्राफ्ट सरकार ने नहीं बल्कि कारपोरेट घरानों ने तैयार किया है, जिसे सरकार वापस लेने में हिचक रही है। वे मंगलवार को चंडीगढ़ में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
अरोड़ा ने कहा कि आज कड़कती सर्दी में किसान पिछले 20 दिन से खुले आसमान के नीचे धरना दे रहे हैं। मगर भाजपा सरकार किसानों की बात मानने की बजाय मामला लटका रही है।
अरोड़ा ने कहा कि सरकार ने कोरोना काल में प्रभावित रोजगार गंवा चुके मजदूरों, पैदल जा रहे गरीबों, बीमारी से जूझ रहे लोगों के हित में कोई बिल लाने की बजाय कृषि क्षेत्र को बड़े पूंजीपतियों के हवाले करने का षड्यंत्र रचने का काम किया।
सरकार अब किसानों के आंदोलन को बदनाम करने पर उतारू है। अरोड़ा ने कहा कि एसवाईएल का फैसला 10 नवम्बर 2016 को सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब विधान सभा द्वारा पारित नदी जल समझौता रद्द करने वाले प्रस्ताव को निरस्त कर दिया था। चार साल इन्होंने कुछ नहीं किया अब किसानों को बांटने के लिए ये मुद्दा उठाया जा रहा है।
उन्होंने जेजेपी नेताओं व उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला की आलोचना करते हुए कहा कि अगर वे चौधरी देवी लाल के वंशज होने का दम भरते हैं तो उन्हें तुरंत अपने पद से इस्तीफा देकर सरकार से बाहर आकर किसानों के साथ खड़ा होना चाहिए।