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चंडीगढ़

एनसीएलटी का काम राष्ट्र की सेवा के समान:न्यायमूर्ति अनूपिंदर सिंह ग्रेवाल

Updated on Sunday, September 06, 2026 13:55 PM IST

चंडीगढ़। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) केवल कॉरपोरेट विवादों का निपटारा करने वाली संस्था नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र की सेवा का महत्वपूर्ण दायित्व निभा रहा है। उक्त विचार एनसीएलटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अनूपिंदर सिंह ग्रेवाल ने चंडीगढ़ में पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) द्वारा आयोजित ‘आईबीसी पल्स 2.0’ कॉन्फ्रेंस में बतौर मुख्य अतिथि भाग लेकर व्यक्त किए।
सम्मेलन में न्यायपालिका, कानूनी क्षेत्र, दिवाला प्रक्रिया से जुड़े विशेषज्ञों और उद्योग जगत से 200 से अधिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लेकर दिवाला एवं दिवालियापन संहिता (आईबीसी), 2016 के तहत देश की बदलती दिवाला समाधान व्यवस्था की समीक्षा की गई तथा प्रक्रिया को अधिक तेज, पारदर्शी और पूर्वानुमान योग्य बनाने के लिए आवश्यक सुधारों पर चर्चा की।

पीएचडीसीसीआई ने किया ‘आईबीसी पल्स 2.0’ कॉन्फ्रेंस का आयोजन
न्यायपालिका व उद्योग विशेषज्ञों ने किया दीवालिया सुधार पर मंथन


न्यायमूर्ति ग्रेवाल ने कहा कि आईबीसी ने भारत की दिवाला समाधान व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि प्रभावी दिवाला समाधान प्रणाली केवल तकनीकी सुविधा नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था के लिए रणनीतिक आवश्यकता है। इससे निवेशकों का भरोसा मजबूत होता है, आर्थिक संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल सुनिश्चित होता है और ऐसी व्यवहार्य कंपनियों को पुनर्जीवित करने में मदद मिलती है, जो अन्यथा अर्थव्यवस्था के लिए खो सकती हैं।
एनसीएलटी के संस्थापक अध्यक्ष एवं जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एम.एम. कुमार ने ट्रिब्यूनल के विकास और बदलती आर्थिक जरूरतों पर प्रकाश डाला। वहीं, एनसीएलटी के पूर्व न्यायिक सदस्य हरनाम सिंह ठाकुर ने लंबित मामलों को कम करने और निपटारे की गति बढ़ाने के लिए एनसीएलटी की अधिक बेंच और सदस्यों के साथ बेहतर बुनियादी ढांचे की आवश्यकता पर जोर दिया।


पीएचडीसीसीआई की एनसीएलटी एवं आईबीसी समिति के चेयर जी.पी. मदान ने कहा कि बढ़ते मामलों के मद्देनजर समयबद्ध समाधान, कारोबारी विश्वास और व्यापक आर्थिक व्यवस्था के लिए एनसीएलटी को अधिक मजबूत और बेहतर संसाधनों से लैस करना जरूरी है। एनसीएलटी के पूर्व न्यायिक सदस्य डॉ. पी.एस.एन. प्रसाद ने भी संस्था की बढ़ती जिम्मेदारियों से निपटने के लिए व्यापक संरचनात्मक और क्षमता निर्माण उपायों की जरूरत बताई।
पीएचडीसीसीआई के डिप्टी सेक्रेटरी जनरल डॉ. जतिंदर सिंह ने सम्मेलन के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसमें नीतिगत संवाद, न्यायिक विकास, संस्थागत मजबूती और आईबीसी के व्यावहारिक क्रियान्वयन से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा की गई। हरियाणा के अतिरिक्त महाधिवक्ता शेखर राज शर्मा ने भारतीय अर्थव्यवस्था में हो रहे बदलावों और उनके विकास पर प्रभाव को रेखांकित किया।
सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में कुलदीप कुमार करीर, प्रवीण गुप्ता, विवेक अत्री, ईशान माडन, अतुल सूद, अनिल कटिया, नवनीत गुप्ता और दिवाला विशेषज्ञ के.वी. जैन सहित अन्य विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। वक्ताओं ने प्रक्रियागत अड़चनों, संस्थागत सुधारों और एनसीएलटी की क्षमता बढ़ाने जैसे मुद्दों पर विचार साझा किए। सम्मेलन के सत्रों का संचालन एनसीएलटी एवं आईबीसी समिति की सह-अध्यक्ष रंजना रॉय गवई, हरीश तनेजा, रचित मित्तल और अभिषेक आनंद ने किया। सम्मेलन के संयोजक जलेश ग्रोवर ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।

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