Saturday, 17 October 2026
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चंडीगढ़

वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम के लिए सेक्टर-26 स्थित बटरफ्लाई पार्क में छोड़ी गईं गैंबूसिया मछलियां

Updated on Wednesday, September 02, 2026 18:09 PM IST

चंडीगढ़, 2 सितंबर 2026: पशुपालन एवं मत्स्य पालन विभाग, यू.टी. चंडीगढ़ ने वन विभाग और स्वास्थ्य विभाग की मलेरिया विंग के सहयोग से सेक्टर-26 स्थित बटरफ्लाई पार्क के जलाशयों में गैंबूसिया मछलियों के मत्स्य बीज छोड़े। इसके साथ ही केंद्र शासित प्रदेश के विभिन्न जलाशयों और तालाबों में मच्छरों के लार्वा का भक्षण करने वाली मछलियां छोड़ने के अभियान का शुभारंभ किया गया।

 

इस अभियान के अंतर्गत चंडीगढ़ में चिह्नित 132 स्थानों पर गैंबूसिया मछलियां छोड़ी जाएंगी और यह अभियान 11 सितंबर 2026 तक पूरा किया जाएगा। यह संयुक्त पहल मलेरिया और डेंगू जैसे मच्छर जनित रोगों की रोकथाम के लिए जैविक नियंत्रण उपायों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

 

गैंबूसिया मछली मच्छरों के लार्वा के जैविक नियंत्रण का एक प्रभावी और पर्यावरण-अनुकूल माध्यम है। एक गैंबूसिया मछली प्रतिदिन लगभग 100 से 300 मच्छर लार्वा खा सकती है। इस प्रकार यह हानिकारक रासायनिक छिड़काव की आवश्यकता के बिना मच्छरों के प्रजनन को उनके स्रोत पर ही नियंत्रित करने में सहायता करती है।

 

इस कार्यक्रम का आयोजन पशुपालन एवं मत्स्य पालन विभाग, यू.टी. चंडीगढ़ के सचिव प्रदीप कुमार, आईएएस के मार्गदर्शन में तथा विभाग के निदेशक नवीन रत्तू की उपस्थिति में किया गया। इस अवसर पर सहायक निदेशक (मलेरिया) डॉ. उपेंद्रजीत सिंह गिल, पशुपालन विभाग के अनुसंधान अधिकारी डॉ. पी.के. सिंह और बटरफ्लाई पार्क की प्रभारी रितिका भी उपस्थित थीं।

 

इस अवसर पर नवीन रत्तू ने कहा कि ठहरे हुए जलाशयों में गैंबूसिया मत्स्य बीज छोड़ना मच्छरों के प्रजनन को नियंत्रित करने की एक पर्यावरण-अनुकूल जैविक विधि है। गैंबूसिया मछलियां मच्छरों के लार्वा को खाती हैं और मलेरिया एवं डेंगू जैसी बीमारियां फैलाने वाले मच्छरों की संख्या कम करने में सहायक होती हैं। उन्होंने कहा कि यह पहल स्वस्थ और मच्छर-मुक्त वातावरण बनाए रखने के लिए चंडीगढ़ प्रशासन के समन्वित दृष्टिकोण को दर्शाती है।

 

पशुपालन एवं मत्स्य पालन विभाग, चंडीगढ़ के संयुक्त निदेशक डॉ. अश्वनी कुमार ने कहा कि विभाग संबंधित विभागों के समन्वय से मच्छरों के संभावित प्रजनन स्थलों पर उनके लार्वा के जैविक नियंत्रण के लिए सक्रिय कदम उठा रहा है। इस प्रकार के अंतर-विभागीय प्रयास चंडीगढ़ में वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम की समग्र रणनीति को और सुदृढ़ करेंगे।

 

अभियान के अंतर्गत छोड़े जा रहे गैंबूसिया मत्स्य बीज पशुपालन एवं मत्स्य पालन विभाग के अधीन संचालित सरकारी मत्स्य बीज फार्म, चंडीगढ़ में तैयार किए गए हैं। विभाग उपयुक्त ठहरे हुए जलाशयों में मच्छरों के लार्वा के जैविक नियंत्रण के लिए नियमित रूप से गैंबूसिया मछलियों का प्रजनन और संचयन करता है।

 

जिन निवासियों को अपने निजी जलाशयों या तालाबों के लिए गैंबूसिया मत्स्य बीज की आवश्यकता है, वे सरकारी मत्स्य फार्म के प्रभारी सुल्तान सिंह, वी.आई. से मोबाइल नंबर 9417495595 पर संपर्क कर सकते हैं।

 

विभाग ने स्वस्थ, स्वच्छ और मच्छर-मुक्त वातावरण बनाए रखने के अपने निरंतर प्रयासों के तहत चंडीगढ़ के उपयुक्त स्थानों पर ऐसे जैविक नियंत्रण उपाय जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।

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