नई दिल्ली, 24 अगस्त: ऑपरेशन सिंदूर के बाद वाघा-अटारी सीमा और वीजा मार्ग बंद होने से पाकिस्तान के सिंध प्रांत से भारत आकर शादी करने वाली कई महिलाओं के सामने मुश्किलें खड़ी हो गई थीं। अब केंद्र सरकार की अनुमति के बाद करीब 150 पाकिस्तानी सिंधी दुल्हनें और उनके परिवार वैकल्पिक हवाई मार्गों के जरिए भारत पहुंच चुके हैं और अपनी शादियां कर चुके हैं।
जानकारी के अनुसार, सिंध के कई परिवार वर्षों से भारत में अपने रिश्तेदारों और परिवारों से जुड़े विवाह संबंधों के लिए वाघा-अटारी सीमा के रास्ते आसानी से आवाजाही करते थे। लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के बाद अटारी मार्ग से भारत आने के लिए वीजा जारी नहीं किए गए। इसके चलते भारत में शादी के लिए सगाई कर चुकी कम से कम 150 पाकिस्तानी महिलाओं की शादियां अटक गई थीं।
नागपुर के सामुदायिक नेता राजेश झंबिया के अनुसार, लंबे प्रयासों के बाद केंद्र सरकार ने इन महिलाओं और उनके रिश्तेदारों को भारत आने के लिए वीजा की अनुमति दी। हालांकि, उन्हें सड़क मार्ग के बजाय हवाई रास्ते से भारत आने की शर्त रखी गई।
झंबिया ने बताया कि इन दुल्हनों और उनके परिवारों ने दुबई, ओमान, श्रीलंका, बांग्लादेश और अन्य देशों के रास्ते भारत की यात्रा की। अप्रैल से अब तक करीब 150 दुल्हनें अपने परिवारों के साथ भारत पहुंच चुकी हैं। इनकी शादियां नागपुर, रायपुर, जोधपुर, पुणे और देश के अन्य शहरों में हुई हैं। इनमें नागपुर की करीब 15 शादियां शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि पाकिस्तान के सिंध प्रांत के घोटकी स्थित शदानी दरबार ने इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शदानी दरबार के आध्यात्मिक प्रमुख संत युधिष्ठिरलाल शदानी से संपर्क कर भारत में शादी करने वाली पाकिस्तानी महिलाओं की सूची तैयार की गई। इसके बाद यह सूची केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजी गई और इन महिलाओं तथा उनके परिवारों को भारत आने की अनुमति देने की अपील की गई।
झंबिया के मुताबिक, अभी भी पाकिस्तान में करीब 300 ऐसी महिलाएं हैं, जिनकी सगाई भारत में हुई है और वे अपनी शादी के लिए भारत आने का इंतजार कर रही हैं। समुदाय की ओर से केंद्र सरकार से इन महिलाओं और उनके परिवारों को भी वीजा जारी करने की मांग की गई है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच आवाजाही पर लगी पाबंदियों ने इन परिवारों के सामने गंभीर मुश्किलें पैदा कर दी थीं। अब वैकल्पिक हवाई मार्ग से मिली अनुमति ने कई परिवारों को राहत दी है।