चंडीगढ़, 18 अगस्त। यूटी चंडीगढ़ में स्वास्थ्य विभाग की निदेशक डॉ.समुन सिंह ने कहा है कि आपदा के समय स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता सबसे महत्वपूर्ण होती है। महिलाओं, किशोरियों और अन्य संवेदनशील समूहों की यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं को आपदा प्रबंधन की मुख्यधारा में शामिल करना आवश्यक है।
सुमन सिंह मंगलवार को फैमिली प्लानिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एफपीए इंडिया), पंचकूला शाखा द्वारा पंजाब बाढ़ प्रतिक्रिया के अनुभवों के प्रसार एवं विश्व मानवीय दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रही थी। उन्होंने कहा कि एफपीए इंडिया द्वारा बाढ़ प्रभावित समुदायों तक सेवाएं और सहायता पहुंचाने का प्रयास सराहनीय है।
पंजाब बाढ़ प्रतिक्रिया एवं विश्व मानवीय दिवस पर एफपीए इंडिया ने आयोजित किया कार्यक्रम
कार्यक्रम में आए हुए अतिथियों का स्वागत करते हुए एफपीए इंडिया पंचकूला की चेयरपर्सन राशि अदलखा ने संस्था द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रमों के बारे में विस्तार जा से जानकारी दी। एफपीए इंडिया की महानिदेशक डॉ. कल्पना आप्टे ने कहा कि मानवीय संकट के दौरान सेवाएं कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं, बल्कि आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं का अभिन्न हिस्सा हैं। एफपीए इंडिया का प्रयास है कि आपदा की स्थिति में भी प्रत्येक व्यक्ति, विशेषकर महिलाओं और लड़कियों को गरिमापूर्ण एवं गुणवत्तापूर्ण यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध रहें। पंजाब में बाढ़ प्रतिक्रिया के दौरान किए गए कार्यों से प्राप्त अनुभव भविष्य की आपदा प्रबंधन रणनीतियों को और मजबूत करने में मदद करेंगे।
एफपीए इंडिया की प्रोग्राम प्रमुख अमिता धानु ने आपदा प्रबंधन योजना में यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं का एकीकरण विषय पर विशेष सत्र लिया। उन्होंने आपदा प्रबंधन योजनाओं में परिवार नियोजन, मातृ स्वास्थ्य, सुरक्षित प्रसव, सेवाओं तथा अन्य यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं को पहले से शामिल करने की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम में डॉ. पल्लवी और डॉ. श्रद्धा ने न्यूनतम प्रारंभिक सेवा पैकेज की आवश्यकता, इसके प्रमुख घटकों तथा आपदा के शुरुआती चरण में यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं की प्राथमिकताओं पर जानकारी साझा की।
एफपीए इंडिया पंचकूला के महाप्रबंधक मनोज कुमार ने भारत में एफपीए इंडिया की पंजाब में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में एफपीए इंडिया द्वारा किए गए स्वास्थ्य संबंधी प्रयासों की जानकारी दी। वक्ताओं ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के दौरान स्वास्थ्य सुविधाओं के बाधित होने से महिलाओं, गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं, किशोरियों और अन्य संवेदनशील आबादी पर विशेष प्रभाव पड़ता है। कार्यक्रम के समापन पर एफपीए इंडिया की पूर्व चेयरपर्सन अनीता बत्रा ने सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।