चंडीगढ़, 13 जुलाई: सामाजिक कल्याण, महिला एवं बाल विकास विभाग, यूटी चंडीगढ़ ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (NFHS-6) तथा पोषण ट्रैकर के अंतर्गत उपलब्ध पोषण संबंधी आंकड़ों की व्याख्या उनके अलग-अलग उद्देश्य, कार्यप्रणाली एवं कवरेज के संदर्भ में की जानी चाहिए। दोनों प्रणालियाँ बाल पोषण की महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करती हैं, किन्तु इनके उद्देश्य भिन्न होने के कारण इनकी सीधे तौर पर तुलना नहीं की जा सकती।
चंडीगढ़ के लिए NFHS-6 सर्वेक्षण 3 अप्रैल से 1 अक्टूबर 2024 के बीच 806 परिवारों, 766 महिलाओं तथा 120 पुरुषों के प्रतिनिधिक नमूने पर आधारित था। हालांकि, सर्वेक्षण में शामिल बच्चों की संख्या का पृथक उल्लेख नहीं किया गया है। इसके विपरीत, पोषण ट्रैकर में वर्तमान में 34,619 पंजीकृत बच्चों का वास्तविक समय (रियल-टाइम) डेटा उपलब्ध है, जिसमें 0–6 माह आयु वर्ग के 2,700 बच्चे, 6 माह से 3 वर्ष आयु वर्ग के 16,587 बच्चे तथा 3–6 वर्ष आयु वर्ग के 15,332 बच्चे शामिल हैं।
विभाग ने बताया कि NFHS-6 और पोषण ट्रैकर के आंकड़ों में दिखाई देने वाला अंतर मुख्यतः दोनों प्रणालियों के अलग-अलग उद्देश्य, कार्यप्रणाली, कवरेज तथा डेटा संग्रहण प्रणाली के कारण है। NFHS-6 एक राष्ट्रीय स्तर का प्रतिनिधिक घरेलू सर्वेक्षण है, जो वैज्ञानिक रूप से चयनित नमूने के आधार पर जनसंख्या स्तर के अनुमान प्रस्तुत करता है। वहीं, पोषण ट्रैकर एक कार्यक्रम-आधारित प्रशासनिक प्लेटफॉर्म है, जो आंगनवाड़ी सेवाओं के अंतर्गत पंजीकृत बच्चों के वास्तविक समय के एंथ्रोपोमेट्रिक माप दर्ज करता है। इसका उद्देश्य बच्चों की निरंतर वृद्धि की निगरानी, कुपोषण की शीघ्र पहचान तथा समयबद्ध पोषण एवं स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
पोषण ट्रैकर के अंतर्गत पंजीकृत बच्चों को नियमित वृद्धि निगरानी, अनुपूरक पोषण, पोषण एवं स्वास्थ्य परामर्श, समय पर स्वास्थ्य रेफरल तथा मिशन सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 के अंतर्गत अनुवर्ती सेवाएँ प्रदान की जाती हैं। इन प्रयासों से कुपोषण की समय रहते पहचान एवं उपचार संभव हो पाता है, जिससे पोषण संबंधी परिणामों में सुधार देखने को मिलता है। दूसरी ओर, NFHS-6 अपेक्षाकृत छोटे नमूने पर आधारित एक क्रॉस-सेक्शनल सर्वेक्षण है, इसलिए गंभीर तीव्र कुपोषण (SAM), मध्यम तीव्र कुपोषण (MAM) तथा कम वजन से संबंधित इसके अनुमान नमूना परिवर्तनशीलता से भी प्रभावित हो सकते हैं।
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि NFHS-6 में चयनित परिवारों के सभी पात्र बच्चों को शामिल किया जाता है, चाहे वे आंगनवाड़ी केन्द्रों में पंजीकृत हों या नहीं। जबकि पोषण ट्रैकर केवल एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) के अंतर्गत पंजीकृत लाभार्थियों को ही कवर करता है। संदर्भित जनसंख्या में यही अंतर भी दोनों प्रणालियों के आंकड़ों में अंतर का एक प्रमुख कारण है।
पोषण संकेतकों की तुलना से स्पष्ट होता है कि क्षीणता (Wasting) की दर NFHS-6 के अनुसार चंडीगढ़ में 22.8 प्रतिशत है, जबकि पोषण ट्रैकर के अनुसार यह राष्ट्रीय स्तर पर 3 प्रतिशत तथा चंडीगढ़ में केवल 0.93 प्रतिशत है। इसी प्रकार अवरुद्ध वृद्धि (Stunting) NFHS-6 में 19.0 प्रतिशत, राष्ट्रीय पोषण ट्रैकर में 29 प्रतिशत तथा चंडीगढ़ के पोषण ट्रैकर में 10.28 प्रतिशत दर्ज की गई है। वहीं कम वजन (Underweight) की दर NFHS-6 में 31.6 प्रतिशत, राष्ट्रीय पोषण ट्रैकर में 11 प्रतिशत तथा चंडीगढ़ के पोषण ट्रैकर में 4.81 प्रतिशत दर्ज की गई है।
पोषण ट्रैकर चंडीगढ़ में बाल पोषण संकेतकों में निरंतर सुधार को दर्शाता है। यह सकारात्मक परिणाम निरंतर वृद्धि निगरानी, अनुपूरक पोषण, पोषण एवं स्वास्थ्य परामर्श तथा मिशन सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 के अंतर्गत समन्वित स्वास्थ्य हस्तक्षेपों का प्रतिफल हैं।
विभाग ने कहा कि NFHS-6 और पोषण ट्रैकर दोनों एक-दूसरे के पूरक सूचना स्रोत हैं तथा प्रत्येक की अपनी अलग उपयोगिता है। NFHS-6 नीति निर्माण एवं मूल्यांकन के लिए जनसंख्या स्तर के प्रमाण उपलब्ध कराता है, जबकि पोषण ट्रैकर वास्तविक समय में कार्यक्रम प्रबंधन, निरंतर निगरानी, समयबद्ध हस्तक्षेप तथा बेहतर सेवा वितरण का प्रभावी माध्यम है। दोनों प्रणालियाँ मिलकर साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को सुदृढ़ करती हैं तथा बच्चों, गर्भवती महिलाओं एवं धात्री माताओं के पोषण एवं समग्र स्वास्थ्य में सुधार के लिए सरकार के निरंतर प्रयासों को मजबूती प्रदान करती हैं।