गुरुग्राम/सूरज रोहिल्ला। ए फाउंडेशन ट्रस्ट, गुरुग्राम (हरियाणा) द्वारा संचालित "मिट्टी की खुशबू" मुहिम ने 18 जून 2021 से 18 जून 2026 तक अपने सफल पांच वर्ष पूर्ण कर लिए हैं। इस दौरान मुहिम ने देशभर के लगभग 2500 से अधिक कुम्हार परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने, सामाजिक सम्मान दिलाने तथा उनके उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने का उल्लेखनीय कार्य किया है।
मुहिम के संस्थापक हीरा अमित रोहिल्ला ने बताया कि मिट्टी के पारंपरिक शिल्प को आधुनिक मार्केटिंग, डिजिटल प्लेटफॉर्म, प्रदर्शनियों और नवाचारों के माध्यम से नई पहचान दिलाई गई है। ए फाउंडेशन ट्रस्ट की टीम द्वारा लगातार नए-नए बेंचमार्क स्थापित किए जा रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप वर्ष 2026 में एमएसएमई क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए राष्ट्रीय बीएमओ अवार्ड से सम्मानित किया गया। यह सम्मान देश की राजधानी में आयोजित समारोह में सांसद मनोज तिवारी द्वारा प्रदान किया गया।
गर्मियों के मौसम में टेराकोटा उत्पादों की मांग में भारी वृद्धि देखने को मिलती है। विशेष रूप से मिट्टी के मटके, सुराही, कुल्हड़, मिट्टी के गिलास, हांडी तथा अन्य शीतलता प्रदान करने वाले उत्पादों की बिक्री सबसे अधिक होती है। गर्मी के मौसम में कुल टेराकोटा बिक्री का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा केवल मटकों का होता है, क्योंकि यह बिना बिजली के पानी को प्राकृतिक रूप से ठंडा रखने का सबसे प्रभावी और स्वास्थ्यवर्धक माध्यम माना जाता है।
उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर, मध्य प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, केरल और ओडिशा जैसे राज्यों में गर्मियों के दौरान टेराकोटा उत्पादों की मांग सबसे अधिक रहती है। बढ़ती जागरूकता के कारण अब शहरी क्षेत्रों में भी लोग फ्रिज के पानी की बजाय मटके और सुराही का उपयोग करने लगे हैं।
मुहिम से जुड़े कुम्हार परिवारों के अनुभव बताते हैं कि मार्च से जून तक का चार माह का समय उनकी वार्षिक आय का सबसे महत्वपूर्ण सीजन होता है। एक सामान्य कुम्हार परिवार गर्मियों में मटका, सुराही और कुल्हड़ जैसे उत्पादों के निर्माण एवं बिक्री से अच्छी आय अर्जित कर लेता है। वहीं डिजाइनर और सजावटी टेराकोटा उत्पादों ने भी कारीगरों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
हीरा अमित रोहिल्ला ने कहा कि "मिट्टी की खुशबू" केवल एक अभियान नहीं बल्कि भारतीय कारीगरों, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने का एक जनआंदोलन बन चुका है। आने वाले वर्षों में हजारों और कुम्हार परिवारों को इस मुहिम से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है ताकि पारंपरिक मिट्टी शिल्प को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जा सके।
उन्होंने कहा कि मिट्टी के उत्पाद पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य संवर्धन और ग्रामीण रोजगार सृजन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यदि समाज स्थानीय कारीगरों द्वारा निर्मित उत्पादों को प्राथमिकता दे तो लाखों परिवारों की आजीविका मजबूत हो सकती है।
अंत में उन्होंने संदेश दिया—
"बनाएंगे हम तो बनेगा भारत महान।"
वंदे मातरम्।