चंडीगढ़। जिंदगी की कठिन राहों में जब हालात ने कदम-कदम पर इम्तिहान लिए, तब भी कई माओं ने हार मानने के बजाय अपने बच्चों के सपनों को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया। किसी ने गरीबी से जंग लड़ी, किसी ने अकेले संघर्ष कर परिवार संभाला तो किसी ने अपने हिस्से की खुशियों का त्याग कर बच्चों का भविष्य संवार दिया। ऐसी ही साहस, त्याग और ममता की मिसाल बनीं 10 संघर्षशील माओं को मंगलवार को आयोजित 13वें मां सम्मान समारोह में सम्मानित किया गया। समारोह में पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने माओं को सम्मानित कर उनके संघर्ष को नमन किया।
बच्चों के सपनों के लिए जूझती रहीं माएं, मंच पर बही भावनाओं की धारा, तालियों के बीच भी छलके आंसू
मानव मंगल ग्रुप ऑफ स्कूल्स और डॉ.जीसी मिश्रा मैमोरियल एजुकेशनल एंड चैरीटेबल ट्रस्ट ने किया 13 वें मां सम्मान समारोह का आयोजन
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मानव मंगल ग्रुप ऑफ स्कूल्स और डॉ. जीसी मिश्रा मेमोरियल एजुकेशनल एवं चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से मानव मंगल स्मार्ट स्कूल में आयोजित समारोह भावनाओं से सराबोर रहा। चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा से आईं माओं की संघर्षगाथाएं सुनकर सभागार में मौजूद हर व्यक्ति भावुक हो उठा। जब मंच से इन माओं के जीवन संघर्ष और समर्पण की कहानियां सुनाई गईं तो पूरा हॉल तालियों की गूंज से भर उठा। हर कहानी यह एहसास करा रही थी कि मां केवल एक रिश्ता नहीं, बल्कि वह अटूट शक्ति है, जो हर तूफान अपने ऊपर झेलकर भी अपने बच्चों को सुरक्षित रखती है।
समारोह की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इस अवसर पर चंडीगढ़ की पलविंदर कौर, राज कुमारी और सुनैना देवी, पंजाब के बुढलाडा की मंजीत कौर, मोहाली की मनप्रीत शर्मा, न्यू चंडीगढ़ की अंजू भाटिया, हरियाणा के करनाल की गिन्नी और कुरुक्षेत्र की बलजीत कौर को सम्मानित किया गया। इसके अलावा, जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन के दौरान शहीद हुए मुल्लांपुर निवासी कर्नल मनप्रीत सिंह की मां मंजीत कौर को भी विशेष रूप से सम्मानित किया गया। वहीं, एसओएस चिल्ड्रेन विलेज इंडिया, राजपुरा की रीटा दास को ‘मदर ऑफ द ईयर’ अवार्ड से नवाजा गया।
इस मौके मुख्य अतिथि पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने मां सम्मान समारोह को समाज के लिए प्रेरणादायी पहल बताते हुए कहा कि मां वह शक्ति है, जो अपने बच्चों को केवल जन्म ही नहीं देती, बल्कि उन्हें संस्कार, शिक्षा, आत्मविश्वास और संघर्षों से लड़ने का साहस भी देती है। उन्होंने कहा कि मां चाहे किसी साधारण व्यक्ति की हो या किसी महान हस्ती की, हर जीवन में मां का स्थान सर्वोच्च होता है और वही सबसे अधिक दिलों पर राज करती है। मां की हिम्मत, त्याग और सहनशीलता का कोई मुकाबला नहीं। भगवान ने मां को ऐसी अद्भुत शक्ति दी है कि वह हर संकट का निडर होकर सामना कर सकती है। भारत का इतिहास भी मातृत्व की महान गाथाओं से भरा पड़ा है। उन्होंने कहा कि स्वयं भगवान भी मां की कोख से जन्म लेते हैं, इसलिए मां की कोख को कभी छोटा नहीं समझना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मां ही बच्चों में संस्कार, अनुशासन और अच्छे गुणों का संचार करती है। अपने आंचल की छांव में वह बच्चों की हर पीड़ा को दूर करने का प्रयास करती है। गरीब से गरीब मां भी कठिन परिस्थितियों में मेहनत कर अपने बच्चों को डॉक्टर, इंजीनियर और ऊंचे पदों तक पहुंचाने का सपना साकार करती है। उन्होंने कहा कि दुनिया भले ही भूल जाए, लेकिन मां अपने बच्चों का ख्याल कभी नहीं भूलती। वह उन्हें पढ़ाई के लिए जगाती है, उनकी जरूरतों का ध्यान रखती है और जीवनभर उनके सुख-दुख में समर्पित रहती है।
उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति प्रतिदिन अपनी मां के चरण स्पर्श करता है, उसके जीवन में सफलता अवश्य आती है, क्योंकि मां स्वयं भगवान का स्वरूप होती है। डॉ. भीमराव आंबेडकर का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी महान व्यक्तित्व के निर्माण में मां की सबसे बड़ी भूमिका होती है। वहीं माता गुजरी और साहिबजादों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सबसे कठिन परिस्थितियों में भी मां ही परिवार को साहस और संस्कारों के साथ संभालती है।
समारोह में मानव मंगल ग्रुप ऑफ स्कूल्स के डायरेक्टर संजय सरदाना, एसोसिएट डायरेक्टर संकल्प सरदाना और समर्थ सरदाना, मानव मंगल हाई स्कूल सेक्टर-21 की ब्रांच डायरेक्टर अंजलि सरदाना तथा डॉ. जीसी मिश्रा मेमोरियल एजुकेशन एवं चैरिटेबल ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी मयंक मिश्रा मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन उमा महाजन ने किया। उल्लेखनीय है कि डॉ. जीसी मिश्रा मेमोरियल एजुकेशन एवं चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से मानव मंगल स्मार्ट स्कूल के सहयोग से पिछले 14 वर्षों से मदर्स डे के अवसर पर मां सम्मान समारोह आयोजित किया जा रहा है। पंजाब यूनिवर्सिटी से सेवानिवृत्त डॉ. जीसी मिश्रा की स्मृति में उनके पुत्र मयंक मिश्रा ने इस ट्रस्ट की स्थापना की थी।
भावनाओं से सराबोर मंचन ने मां और मातृभूमि को किया नमन
मां सम्मान समारोह के दौरान उस समय पूरा सभागार भावनाओं से भर उठा जब मानव मंगल स्मार्ट स्कूल-64 के छात्र-छात्राओं ने माँ के निस्वार्थ प्रेम, अथाह त्याग, अनकहे संघर्ष और ममता की मधुर छांव को अपनी सशक्त और जीवंत प्रस्तुति के माध्यम से मंच पर उतार दिया। प्रस्तुति के हर दृश्य, हर भाव और हर अभिव्यक्ति ने दर्शकों के हृदय को भीतर तक छू लिया। कई क्षण ऐसे भी आए जब उपस्थित दर्शकों की आंखें नम हो उठीं और पूरा सभागार एक गहन भावनात्मक मौन में डूब गया। इसके साथ ही विद्यार्थियों ने उस परम वंदनीय शक्ति—मातृभूमि और भारत माँ—को भी श्रद्धापूर्वक नमन किया, जो भले ही भौतिक रूप में हमारे सामने उपस्थित न हों, लेकिन जन-जन के हृदय में सदा अमर और सदा जीवंत रहती हैं।
रीटा दास को मिला मदर ऑफ द ईयर पुरस्कार
समारोह में एसओएस चिल्ड्रेन विलेज इंडिया, राजपुरा की रीटा दास को मदर ऑफ द ईयर पुरस्कार दिया गया। रीटा दास ने 36 बेसहारा बच्चों को अपना बनाकर उनकी जिंदगी रोशन कर दी। वर्ष 1996 में मात्र 25 साल की उम्र में वह एसओएस चिल्ड्रेन विलेज पहुंचीं थीं। यहां उन्हें “मां” की जिम्मेदारी सौंपी गई। उस समय शायद उन्होंने भी नहीं सोचा होगा कि आने वाले वर्षों में वह सैकड़ों अनाथ बच्चों की जिंदगी बदल देंगी। आज उनकी ममता और परवरिश की चमक दुनिया के अलग-अलग कोनों तक पहुंच चुकी है। कोई फैशन डिजाइनिंग के क्षेत्र में नाम कमा रहा है, कोई मल्टीनेशनल कंपनियों में कार्यरत है, तो कोई मेडिकल और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में अपनी जिम्मेदारियां निभा रहा है। उनके एक बेटे ने अमेरिका में अपना सफल कारोबार स्थापित किया है।
इन माओं ने हालात नहीं, हौसलों से लिखी अपने बच्चों की तकदीर
समारोह में सम्मानित होने वाली हरियाणा के करनाल की निवासी गिन्नी राजस्थान के जिंगर समुदाय से संबंध रखती हैं। वह खुद कभी स्कूल नहीं जा सकीं, लेकिन उन्होंने अपनी बेटियों को इस काबिल बनाया कि आज वह अपने पैरों पर खड़ी हैं। इसी तरह समारोह में इंस्टीट्यूट फॉर द ब्लाइंड की केयरटेकर पलविंदर कौर को सम्मानित किया गया जिनके दोनों बच्चे दृष्टिहीन हैं और उनकी तपस्या के कारण ही उनके बेटे ने सीबीएसई दसवी में स्कूल में टॉप किया। पंजाब के बुधलाडा की मंजीत कौर को भी समारोह में सम्मान मिला। दिन-रात दिहाड़ी मजदूरी कर उन्होंने बस एक ही सपना जिया कि उनकी तीनों बेटियां पढ़-लिखकर अपने पैरों पर खड़ी हों। तीनों बेटियों ने पिछले साल यूजीसी नेट की परीक्षा उत्तीर्ण कर मां के सपने को साकार किया। चंडीगढ़ की एक कॉलोनी में एक छोटी-सी झुग्गी में अपनी जिंदगी शुरू करने वाली राज कुमारी को समारोह में सम्मानित किया गया। उन्होंने संघर्षों से लड़ते हुए दोनों बेटों को काबिल बनाया। वहीं, समारोह में सम्मानित होने वाली कुरुक्षेत्र निवासी बलजीत कौर ने पति के निधन के बाद कई तरह की चुनौतियों का सामना करते हुए अपने दोनों बेटों को डॉक्टर बनाया।