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चंडीगढ़

राज्यपाल ने उच्च शिक्षण संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने का किया आह्वान

Updated on Monday, May 18, 2026 18:32 PM IST

चंडीगढ़, 18 मई: पंजाब के राज्यपाल एवं यू.टी. चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया की अध्यक्षता में पंजाब लोक भवन, चंडीगढ़ में “उच्च शिक्षण संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण हेतु एक समान नीति” विषय पर वाइस-चांसलर्स कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। सम्मेलन को संबोधित करते हुए राज्यपाल श्री कटारिया ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य केवल शैक्षणिक विषय नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण और युवाओं के भविष्य की मजबूत आधारशिला है। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थान अक्सर डिग्री, प्लेसमेंट और आधारभूत संरचना पर ध्यान केंद्रित करते हैं, लेकिन विद्यार्थियों के मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को भी समान महत्व दिया जाना आवश्यक है, क्योंकि स्वस्थ मन के बिना सफलता अधूरी रहती है।

 

पंजाब के विश्वविद्यालयों से शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की अपील

पंजाब लोक भवन में “उच्च शिक्षण संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण हेतु एक समान नीति” विषय पर वाइस-चांसलर्स कॉन्फ्रेंस आयोजित

विद्यार्थियों में बढ़ते तनाव, अकेलेपन, डिजिटल लत, शैक्षणिक दबाव और रोजगार संबंधी अनिश्चितताओं पर चिंता व्यक्त करते हुए राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों एवं कॉलेजों से प्रभावी काउंसलिंग प्रणाली, हैप्पीनेस एवं वेलनेस सेल, पीयर-मेंटॉरिंग कार्यक्रम तथा छात्र-से-छात्र सहयोग तंत्र विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों में ऐसा सुरक्षित, संवेदनशील और सहयोगात्मक वातावरण बनाया जाना चाहिए, जहाँ कोई भी विद्यार्थी स्वयं को अकेला या उपेक्षित महसूस न करे।

कौशल आधारित एवं रोजगारोन्मुख शिक्षा के महत्व पर बल देते हुए राज्यपाल ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। उन्होंने युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने तथा समाज के कमजोर वर्गों को सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराने के लिए व्यावसायिक एवं रोजगारोन्मुख शिक्षा को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। नशा मुक्ति अभियान में शिक्षण संस्थानों की सक्रिय भागीदारी का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि शैक्षणिक परिसर युवाओं के लिए जागरूकता, मार्गदर्शन और सकारात्मक परिवर्तन के केंद्र बनने चाहिए।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 तथा भारत सरकार की टेली-मानस और मनोदर्पण जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को अब राष्ट्रीय विकास के महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने सभी विश्वविद्यालयों से मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता और नशा मुक्ति को संस्थागत संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बनाने का आह्वान किया तथा विश्वास व्यक्त किया कि पंजाब के विश्वविद्यालय भावनात्मक रूप से सशक्त और भविष्य के लिए तैयार युवाओं के निर्माण में राष्ट्रीय मॉडल के रूप में उभरेंगे।

 

सम्मेलन के दौरान यूजीसी की संयुक्त सचिव डॉ. सुनीता सिवाच ने मानसिक स्वास्थ्य और छात्र कल्याण से संबंधित “सांख्यिकीय परिप्रेक्ष्य, वैश्विक दृष्टिकोण एवं राष्ट्रीय पहलों” विषय पर मुख्य वक्तव्य दिया। इसके अतिरिक्त, एबीवीआईएमएस एवं डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल, नई दिल्ली के मानसिक स्वास्थ्य उत्कृष्टता केंद्र के मनोचिकित्सा विभाग के प्रोफेसर प्रो. आर.के. बनीवाल ने “मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता” विषय पर व्याख्यान देते हुए उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रारंभिक हस्तक्षेप, परामर्श और जागरूकता के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला।

इसके अलावा, पाँच विश्वविद्यालयों द्वारा मानसिक स्वास्थ्य, नशा मुक्ति, छात्र कल्याण तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन पर प्रस्तुतियाँ भी दी गईं। इस अवसर पर राज्यपाल पंजाब के अतिरिक्त मुख्य सचिव विवेक प्रताप सिंह, जनगणना संचालन एवं नागरिक पंजीकरण निदेशक ललित जैन तथा सम्मेलन का संचालन करने वाले कुलपति डॉ. जसपाल सिंह संधू सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, वरिष्ठ शिक्षाविद्, मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ और फैकल्टी सदस्य उपस्थित रहे।

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