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राष्ट्रीय

विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर एक खास प्रस्तुति 

Updated on Saturday, April 18, 2026 19:52 PM IST

आलेख - डॉ. श्याम नंदन प्रसाद, पर्यावरणविद्,

डॉ नदीम अहमद 

पटना :- आज पूरा विश्व पर्यावरण संकट की दंश झेल रहा है । मानव जनित गतिविधियों से ही ऐसी विषम परिस्थिति उत्पन्न हुई है । स्थिति इतनी भयावह है कि यदि हम अभी भी प्रकृति और पर्यावरण से छेड़ छाड़ बंद नहीं किए , तब एक ना एक दिन इस सृष्टि से हमारा मिट जाना तय है ।

आज विश्व धरोहर दिवस मनाया जा रहा है । यूनेस्को ने भारत के 40 स्थलों को धरोहर घोषित किया है । इस कदम की मैं सराहना करता हूं । इसका मुख्य उद्देश्य मानव सभ्यता से जुड़े ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों के संरक्षण के प्रति लोगों में जागरण करना है । यह कदम सभी दृष्टिकोण से उचित भी है । ये धरोहरों केवल इमारतें नहीं हैं , बल्कि हमारे पूर्वजों की मेहनत , कला , परंपरा और सोच का जीवंत उदाहरण हैं ।
एक पर्यावरणविद् होने के नाते मेरा स्पष्ट मानना है कि हमारे पुराने वृक्ष भी हमारे धरोहर / विरासत हैं । पुराने वृक्ष जैव विविधता ( BIODIVERSITY ) को कायम रख कर पर्यावरण संतुलन में अहम भूमिका निभाते हैं , यह एक निर्विवाद सत्य है । पुराने वृक्ष जैव विविधता का मुख्य स्तंभ हैं , जो सैंकड़ों प्रजातियों जैसे पंछी , कीड़ों , कवक अन्य जीवों के लिए भोजन , आश्रय , घर प्रदान करते हैं । अत्यधिक शाखाओं के कारण विशाल आकार होने से से पुराने वृक्ष युवा वृक्षों की तुलना में ज्यादा कार्बन डाइऑक्साइड सोख कर कार्बन सिंक की तरह कार्य करते हैं । परिणाम स्वरुप ज्यादा मात्रा में जीवन रक्षक ऑक्सीजन वायुमंडल में छोड़ते हैं । पुराने पेड़ जलवायु परिवर्तन के कुप्रभावों को रोकने और वन पारिस्थितिकी तंत्र में संतुलन बनाने रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं । इसी को सरल भाषा में कहते हैं " जैव विविधता " । जैव विविधता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पुराने वृक्षों में पीपल , बरगद , पाकर , आक , नीम , परिजात , अशोक और आंवला उल्लेखनीय हैं । इन वृक्षों को अविलंब संरक्षित कर इन्हें विरासत वृक्ष घोषित किए जाने की घोर आवश्यकता है , ताकि पर्यावरण संकट से जूझ रहे मानव और पारिस्थितिकी तंत्र के अन्य जीवों को इस संकट से मुक्ति दिलाने में हम सफल हों । यह एक अत्यंत ही हर्ष की बात है कि बिहार सरकार ने 32 पुराने वृक्षों को विरासत वृक्ष घोषित किया है । मैं इसका स्वागत करता हूं । पूरे देश में एक अभियान चलाकर पुराने वृक्षों को संरक्षित कर विरासत वृक्ष घोषित किया जाना चाहिए ।

आइए ! आज विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर हम इस बात की प्रतिज्ञा करें कि हम उपर्युक्त वर्णित वृक्षों को नहीं काटेंगे , बल्कि उन्हें संरक्षित करने में सकारात्मक भूमिका निभाएंगे । यदि हम अपने शास्त्रों पर एक नजर डाले, तब हमें ज्ञात होगा कि प्राचीन काल में भी पीपल वृक्ष की पूजा होती थी । हमारे पूर्वजों को इस बात का ज्ञान था कि पीपल सबसे ज्यादा जीवन रक्षक ऑक्सीजन वायुमंडल में मुक्त करता है । यदि वनस्पति शास्त्र के दृष्टिकोण से देखा जाए , तब जैव विविधता में प्रमुख रोल अदा करने के कारण ही पीपल , बरगद, पाकर , परिजात, नीम इत्यादि वृक्ष महत्व्पूर्ण हैं ।
आज विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर मैं भारत के प्रत्येक सम्मानित नागरिक से अपील करता हूं कि पुराने वृक्षों के महत्व को समझें और उन्हें संरक्षित करने में सकारात्मक भूमिका अदा करें ।
" पर्यावरण ही जीवन है " ।
" हरे पेड़ पौधों के बिना हम जीने की कल्पना भी नहीं कर सकते हैं " ।

Readers' Comments
Dr. Shyam Nandan Prasad , ENVIRONMENTALIST 4/18/2026 8:02:58 PM

Very nice. You are a Symbol of High knowledge and thought . As you are a Professor like me , you deserve appreciation. . My blessings are always with you. Wish you a Happy and prosperous life.

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