चंडीगढ़। सामाजिक एवं मनोवैज्ञानिक पहलुओं को छूते हुए नाटक आउट ऑफ फ्रेम ने सिटी ब्यूटीफुल वासियों का जहां मनोरंजन किया वहीं उनके सामने एक सवाल भी छोड़ा कि समाज द्वारा बनाए गए फ्रेम अथवा सिस्टम में ढलने की बजाए उसे बदलना कितना चुनौतीपूर्ण है। रुद्र कायरा प्रोडक्शन की तरफ से चंडीगढ़ के टैगोर थिएटर स्थित मिनी ऑडिटोरियम में प्रस्तुत इस नाटक में सुप्रीत सिंह, सैय्यद अलीम तथा सुचिता शर्मा ने अपने किरदारों के साथ बखूबी न्याय करते हुए दर्शकों की तालियां बटोरी व सामाजिक पहलुओं को छूते हुए मनोरंजन किया।
चंडीगढ़ के टैगोर थिएटर में किया सफल मंचन
अमित सनौरिया के निर्देशन में बने करीब एक घंटा दस मिनट के नाटक आउट ऑफ फ्रेम का संगीत संचलन अर्पण मैती, सेट सज्जा करण व हरदीप तथा कार्यकारी निर्माता के रूप में शुचि सिंह ने अपनी जिम्मेदारी निभाई। यह एक ऐसे कलाकार कबीर की कहानी है, जो समाज द्वारा बनाए गए ‘फ्रेम’ में ढलने से इनकार करता है। वह हर उस अन्याय और चुप्पी के खिलाफ आवाज उठाता है जिसे लोग सामान्य मान चुके हैं। उसकी कला सजावट नहीं, सवाल है। लेकिन जब समाज उसके सवालों को स्वीकार नहीं करता, तो वह धीरे-धीरे अकेला पड़ जाता है।