चंडीगढ़, 14 मई। हरियाणा में एक लाख से अधिक प्रवासी मजदूर अभी तक पलायन कर चुके हैं। सात लाख के लगभग मजदूर अभी जाने का इंतजार कर रहे हैं। इन मजदूरों ने बाकायदा सरकार द्वारा बनाए गए ऑनलाइन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करवाया है। वहीं दूसरी ओर, पंजाब से कच्चे रास्तों व घग्गर नदी को पार करके हरियाणा में पहुंच रहे मजदूरों ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं।हरियाणा से पलायन करने के लिए रजिस्ट्रेशन करवाने वाले 8 लाख श्रमिकों में 80 प्रतिशत के करीब उत्तर प्रदेश व बिहार के हैं। बाकी झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र व राजस्थान आदि राज्यों के कामगार हैं। राज्य सरकार को इन मजदूरों की वजह से अतिरिक्त प्रबंध करने पड़ते हैं। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर पहले ही कह चुके हैं कि सरकार अभी तक 28 रेलगाडिय़ों और 2000 बसों से एक लाख के करीब मजदूरों को उनके मूल राज्यों में पहुंचा चुकी है। बाकी मजदूरों को भेजने के प्रबंध भी सरकार कर रही है लेकिन इसके लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय की हिदायतों का पालन करना अनिवार्य है।
गृह व स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने गुरुवार को कहा कि सरकार एक ही दिन में सभी मजदूरों को भेजने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, गृह मंत्रालय ने साफ कहा है कि मजदूरों को तभी भेजा जाएगा जब दोनों राज्य इसके लिए राजी होंगे। मतलब जिस प्रदेश से मजदूर अपने राज्य में जा रहे हैं और जिस प्रदेश में लौटना चाहते हैं।विज ने कहा कि जब तक सामने वाले राज्य की एनओसी नहीं मिल जाती, कोई भी प्रदेश मजदूरों को अपने यहां से नहीं भेज सकता। एनओसी के बिना रेल मंत्रालय भी विशेष श्रमिक रेलगाडिय़ों का प्रबंध नहीं करता। विज का कहना है कि बड़ी संख्या में पंजाब से श्रमिक हरियाणा आ रहे हैं। इनमें से अधिकांश मजदूर यूपी जाना चाहते हैं। विज ने कहा कि पंजाब सरकार की लापरवाही की वजह से वहां के श्रमिक पलायन कर रहे हैं।