चंडीगढ़, श्रद्धेय जैन मुनि अभय कुमार जी स्वामी के ब्रह्मलीन होने पर आज अणुव्रत भवन, सेक्टर 24-सी, चंडीगढ़ में एक स्मृति सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ प्रशासक श्री गुलाब चंद कटारिया ने मुनिश्री को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि “मुनिश्री अभय कुमार जी ने तप और साधना से परिपूर्ण जीवन जिया। उन्होंने धर्मसंघ की सेवा में अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। उनके तप और त्याग को मैं नमन करता हूँ।”
मुनिश्री अभय कुमार की स्मृति सभा में राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने अर्पित की श्रद्धांजलि
कहा – मुनिश्री अभय कुमार जी ने तप और साधना से परिपूर्ण जीवन जिया, उनके त्याग और संयम को मैं नमन करता हूँ
राज्यपाल कटारिया ने कहा कि मुनिश्री के महाप्रयाण का समाचार सुनकर उन्हें गहरा दुःख हुआ। उन्होंने बताया कि “मुझे कल ही यह खबर मिली, परंतु कई व्यवस्थाओं के चलते तत्काल पहुंच नहीं सका। पर आज जब स्मृति सभा में उपस्थित हुआ, तो मन अत्यंत भावुक हो उठा।”
उन्होंने कहा कि उन्हें यह जानकर अत्यंत आश्चर्य हुआ कि मनीषीसंत मुनिश्री विनय कुमार जी आलोक, जो अभय मुनि के बड़े भ्राता हैं, अपने अनुज की निरंतर सेवा करते रहे — यह अपने आप में एक अनूठा आदर्श है। राज्यपाल ने कहा कि अभय मुनि समता, सादगी, विनम्रता और मधुर वाणी की एक जीवंत मिसाल थे। लंबे समय तक धर्मसंघ की सेवा में रत रहकर उन्होंने संयम और समर्पण का उदाहरण प्रस्तुत किया।
श्री कटारिया ने आगे कहा कि मुनिश्री अभय कुमार जी जैसे संत समाज में नैतिकता, शांति और सद्भाव के संदेश लेकर आते हैं। उनका जीवन हर किसी के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा।
स्मृति सभा को संबोधित करते हुए मनीषीसंत मुनिश्री विनय कुमार जी आलोक ने कहा कि अभय मुनि उनके अनुज भ्राता थे जिनके साथ उनका लगभग 70 वर्षों का गहरा संबंध रहा। उन्होंने बताया कि कठिन जीवन परिस्थितियों के बावजूद अभय मुनि सदैव परिश्रमी, सेवाभावी और धर्म कार्यों में समर्पित रहे। “अभय मुनि ने करोड़ों मंत्रों का कंठस्थ और आलेखन किया, वे कई भाषाओं के ज्ञाता थे तथा जैन आगम, वेद, उपनिषद, व्याकरण, न्याय, इतिहास आदि का गहन अध्ययन किया,” उन्होंने कहा।
मुनिश्री विनय कुमार जी ने बताया कि अभय मुनि का जन्म राजस्थान के सरदार शहर में एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। उनके पिता सुमेर मल जी और माता श्रीमती भंवरी देवी थीं। चार भाई-बहनों में वे तीसरे क्रम पर थे और उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा सरदार शहर से ही प्राप्त की। स्मृति सभा में मुनि सुधाकर कुमार जी ने कहा कि “अभय मुनि ने हमें सिखाया कि जीवन को कैसे जिया जाए। संसार में हर कोई जी रहा है, पर जीवन को सार्थक कैसे बनाया जाए, यह उन्होंने अपने आचरण से दिखाया।” उन्होंने कहा कि मुनिश्री अभय कुमार जी जैन आगमों और तत्सम ग्रंथों के गहन ज्ञाता थे, और उनका जीवन सहज, सरल व मिलनसार था।
स्मृति सभा का आरंभ अभय कुमार जी को दो मिनट के मौन से श्रद्धांजलि देकर किया गया, जिसके उपरांत प्रज्ञा जैन ने भजन के माध्यम से मुनिश्री को नमन किया। इस अवसर पर पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुवाहाटी सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए श्रद्धालु एवं ट्राइसिटी के अनेक श्रावक-श्राविकाओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया और अभय कुमार जी के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। सभा में पंजाब राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया, पूर्व रेलमंत्री पवन कुमार बंसल, रमेश नवलंखा, पंजाब सभा के अध्यक्ष, अभय कुमार जी के पोते श्री पंकज जैन वैद्य पी.सी. सिंगला, विजय शर्मा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।