चंडीगढ़। सामाजिक कल्याण, महिला एवं बाल विकास विभाग, चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा पोषण अभियान के अंतर्गत आयोजित सामुदायिक कार्यक्रमों (Community-Based Events – CBEs) एवं सघन स्वास्थ्य एवं पोषण अभियानों के छह माह सफलतापूर्वक पूर्ण किए गए हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा पोषण में सुधार करना रहा है, जिनका आयोजन बापू धाम, पलसोरा और बुरैल जैसे प्रमुख क्षेत्रों में किया गया, जहाँ समुदाय के सक्रिय सहयोग एवं फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं की सहभागिता सराहनीय रही।
सामुदायिक कार्यक्रमों एवं स्वास्थ्य एवं पोषण अभियानों के छह माह की सफल पूर्णता का हुआ उत्सव
अभियान की विशेष उपलब्धि बाल अन्नप्राशन समारोह रहा जो बापू धाम में आयोजित किया गया। यह सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण अवसर उन शिशुओं के लिए होता है जिन्होंने छह माह पूरे कर लिए हैं, और यह पूरक आहार की शुरुआत का प्रतीक है। इस अवसर पर माताओं को समय पर एवं संतुलित पूरक आहार की महत्ता से अवगत कराया गया। साथ ही प्रधान मंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) के अंतर्गत पात्र गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली माताओं के पंजीकरण हेतु विशेष जागरूकता एवं नामांकन अभियान चलाया गया, ताकि वे योजना के आर्थिक लाभ प्राप्त कर सकें और मातृ-शिशु स्वास्थ्य में सुधार हो।
पलसोरा क्षेत्र में कुपोषित बच्चों के विकास मॉनिटरिंग पर विशेष ध्यान दिया गया। आंगनवाड़ी केंद्रों पर नियमित जांच के माध्यम से बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति का मूल्यांकन किया गया। जिन बच्चों में कुपोषण के लक्षण पाए गए, उन्हें परामर्श एवं आवश्यक चिकित्सा सहायता हेतु संदर्भित किया गया। साथ ही, माता-पिता के साथ परामर्श सत्र आयोजित किए गए, जिनमें संतुलित पोषण, स्वच्छता, समय पर स्वास्थ्य जांच और संवेदनशील देखभाल जैसे विषयों पर जागरूकता बढ़ाई गई।
बुरैल में माताओं के लिए पूरक आहार पर लाइव रेसिपी डेमोन्स्ट्रेशन आयोजित किए गए, जहाँ आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने स्थानीय रूप से उपलब्ध सामग्रियों का उपयोग कर 6 से 24 माह के बच्चों के लिए पौष्टिक, सस्ते और स्वादिष्ट व्यंजन तैयार करने का तरीका बताया। इन सत्रों से माताओं को बच्चों के भोजन में विभिन्न खाद्य समूहों को शामिल करने हेतु प्रोत्साहित किया गया ताकि प्रारंभिक वर्षों में उन्हें समुचित पोषण मिल सके।
छह माह की इस सघन मुहिम के दौरान कई अन्य महत्वपूर्ण गतिविधियाँ भी की गईं—जैसे जन्म के पहले घंटे में स्तनपान की शुरुआत को बढ़ावा देना, गर्भवती महिलाओं के आहार में मोटे अनाज (मिलेट्स) को शामिल करना, पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों की नियमित विकास निगरानी, 3 से 6 वर्ष के बच्चों की पूर्व-प्राथमिक शिक्षा को सशक्त बनाना, संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने हेतु घर-घर जाकर परामर्श देना, तथा प्रसवपूर्व देखभाल, नियमित जांच, सप्लीमेंट्स एवं एनीमिया से बचाव पर जागरूकता फैलाना।
इसके अतिरिक्त, बच्चों में मुख स्वच्छता, खाद्य सुदृढ़ीकरण (food fortification) एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों (micronutrients) के महत्व पर समुदायिक व्याख्यान भी आयोजित किए गए। फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं द्वारा गंभीर तीव्र कुपोषण (SAM) से पीड़ित बच्चों की पहचान, परामर्श एवं पुनर्वास पर भी विशेष ध्यान दिया गया। घर-घर जाकर परिवारों को सरल और पौष्टिक पूरक आहार बनाने के व्यावहारिक तरीके सिखाए गए।
इन छह महीनों की यह सामुदायिक पहल विभाग की मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा पोषण स्थिति को सुदृढ़ करने की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इन एकीकृत प्रयासों का उद्देश्य जागरूकता बढ़ाना, व्यवहार परिवर्तन को प्रोत्साहित करना और यह सुनिश्चित करना है कि चंडीगढ़ का हर बच्चा स्वस्थ, शिक्षित और समृद्ध जीवन की दिशा में अग्रसर हो सके।