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चंडीगढ़

दशरथ दरबार से वनवास तक का भावपूर्ण सफर देख दर्शकों की आंख में आए आंसु

Updated on Tuesday, September 23, 2025 17:14 PM IST

 
 
पंचकूला। हर साल की तरह इस साल भी रामलीला युवा मंच, पंचकूला का मंचन दर्शकों के बीच अपनी गहरी छाप छोड़ रहा है। मंगलवार, 23 सितंबर को पांचवें दिन की रामलीला ने अयोध्या के दशरथ दरबार से लेकर भगवान राम के वनवास तक का भावपूर्ण सफर दिखाया। कलाकारों के अद्भुत अभिनय और सजीव दृश्यों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
 

दशरथ दरबार से वनवास तक का भावपूर्ण सफर देख दर्शकों की आंख में आए आंसु

कलाकारों का शानदार प्रदर्शन
रामलीला के इस हिस्से में कलाकारों ने अपने किरदारों को जीवंत कर दिया। मोहित शर्मा ने भगवान राम के रूप में अपनी भूमिका को बेहद ही शालीनता और गंभीरता से निभाया। उनके चेहरे पर शांत भाव और विनम्रता ने राम के चरित्र को सही मायनों में दर्शाया। वहीं, आंचल ठाकुर ने सीता के रूप में अपनी भूमिका में प्रेम और त्याग के भाव को खूबसूरती से प्रदर्शित किया।
 
दशरथ दरबार से कोप भवन तक
रामलीला की शुरुआत दशरथ दरबार से हुई, जहाँ महाराज दशरथ ने राम के राजतिलक की घोषणा की। इस दृश्य में राजा दशरथ का किरदार निभा रहे हिमांशु शर्मा का अभिनय सराहनीय था। दर्शकों को लगा जैसे वे स्वयं उस ऐतिहासिक दरबार में मौजूद हैं।
इसके बाद, मंथरा और कैकेई के संवाद ने कहानी में एक नया मोड़ ला दिया। राकेश शर्मा ने मंथरा के किरदार में चालाकी और ईर्ष्या का भाव बखूबी दिखाया, जबकि काजल ने कैकेई के रूप में एक मजबूर माँ के हृदय में छिपे लालच और मोह को दर्शाया। कैकेई के कोप भवन में प्रवेश करने का दृश्य इतना प्रभावशाली था कि दर्शकों की आँखें नम हो गईं।
 
राम का त्याग और समर्पण
मंचन का सबसे भावपूर्ण हिस्सा तब आया जब भगवान राम, माता कौशल्या और कैकेई से विदा लेने गए। लक्ष्मी ने कौशल्या के किरदार में अपनी ममता और दुःख को इतने अच्छे से दिखाया कि दर्शकों ने उनकी पीड़ा को महसूस किया। वहीं, राम और सीता के संवाद में उनके त्याग और समर्पण को देखकर दर्शकों की आँखें भर आईं।
राम के वनवास जाने के दृश्य ने सभी को भावुक कर दिया। जब राम, लक्ष्मण और सीता वन की ओर निकले, तो दर्शकों ने उन्हें भावभीनी विदाई दी।
 
अन्य कलाकारों का भी योगदान
इस शानदार प्रदर्शन में अन्य कलाकारों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। लक्ष्य शर्मा ने लक्ष्मण के रूप में अपने बड़े भाई के प्रति अटूट प्रेम और सम्मान को दर्शाया, जबकि हिमांशु शर्मा ने दशरथ की पीड़ा को बखूबी निभाया। कलाकारों की पूरी टीम ने इस पौराणिक कहानी को एक बार फिर जीवंत कर दिया। कुल मिलाकर, पाँचवें दिन की रामलीला ने दर्शकों को भक्ति, त्याग और समर्पण के गहन भावों से भर दिया। यह मंचन सिर्फ एक नाटक नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक यात्रा था, जिसने दर्शकों के दिलों को छू लिया।
 
  
 
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