पंचकूला। द गुरुकुल आर्यसमाज सेक्टर 20 पंचकूला के 22वें वार्षिक उत्सव के त्रि दिवसीय (12 सितम्बर से 14 सितम्बर 2025) कार्यक्रम के अंतर्गत आज आखिरी दिन 21 कुण्डीय विशाल यज्ञ का आयोजन किया गया जिसमें यज्ञवेदी पर 84 यजमानों ने बड़ी श्रद्धा के साथ भाग लिया। यह यज्ञ आर्य जगत के मूर्धन्य वैदिक विद्वान आचार्य विरेन्द्र शास्त्री जी के सुयोग्य ब्रह्मत्व में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ जिन्होंने वेदों से लिए गए विशिष्ट मन्त्रों से यज्ञ में आहुतियाँ डलवाकर प्राणी-मात्र के कल्याण के लिए मंगल कामना करते हुए, वहां उपस्थित सभी आर्यजनों को वैदिक ऋचाओं का वाचन करते हुए उन्हें शुभ कामनाएं प्रदान की। यज्ञ संचालन एवम् मंत्रोच्चारण का कार्य धर्माचार्य परमेश्वर शास्त्री व श्री रामप्रसाद शास्त्री जी ने किया।
द गुरुकुल आर्यसमाज ने किया 21 कुण्डीय विशाल यज्ञ
इसके उपरान्त अगला कार्यक्रम गुरुकुल के मुख्य हाल में प्रारंभ हुआ जिसमें खतौली, मुजफ्फरनगर से पधारे हुए आर्य जगत के सुप्रसिद्ध भजनोपदेशक पं० घनश्याम जी प्रेमी व उनके सहयोगी ने अपने सुमधुर कंठ से बहुत ही प्रेरणादायी गीतों तथा भजनों के माध्यम से समस्त श्रोतागणों को आनंदविभोर कर दिया। उनके द्वारा गाए गए गीत - "प्रभु के गीत गाने में मज़ा है, उसे अपना बनाने में मज़ा है, वहीं सिर को झुकाने में मज़ा है।" के साथ सभी श्रोतागण झूम झूम उठे और कुछ समय के लिए जैसे समय भी थम गया। उन्होंने वीर भगत सिंह एवं उनके साथियों के जीवन से जुड़े प्रसंगों को स्वरचित गीतों को सुना वातावरण को वीर रस से परिपूर्ण कर दिया।
इस त्रिदिवसीय कार्यक्रम के आख़िरी दिन मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित केंद्रीय आर्यसभा चंडीगढ़ तथा आर्यसमाज सेक्टर 7 चंडीगढ़ के प्रधान आदरणीय रवीन्द्र तलवार तथा अति विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित श्रीमती कमलेश थरेजा एवम् श्री ओमप्रकाश गुगलानी जी की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा को और बढ़ा दिया। आर्य समाज सेक्टर-9 पंचकूला के प्रधान धर्मवीर बत्रा, वरिष्ठ उप प्रधान डॉ रमेश चन्द्र बावा और आर्य समाज सेक्टर 7 चण्डीगढ़ के मंत्री श्री प्रकाश चंद जी की व आर्य समाज सेक्टर 20 की प्रधाना डॉ रजनी थरेजा जी ने भी अपनी गरिमामयी उपस्थिति से मंच को सुशोभित किया।
मुख्य कार्यक्रम आरम्भ होने से पूर्व आर्यसमाज द गुरुकुल के मंत्री श्री योगेन्द्र क्वात्रा ने आमंत्रित सभी अतिथियों का शाल तथा पुष्पगुच्छ प्रदान कर विधिवत तरीके से सम्मानित किया। योगेन्द्र क्वात्रा जी ने थरेजा परिवार द्वारा प्रदान किए जा रहे सहयोग के लिए उनका विशेष रूप से हार्दिक धन्यवाद किया क्योंकि उन्हीं के सहयोग से प्रतिपल प्रेरणा पाकर यह आर्यसमाज यथासामर्थ्य वेद प्रचार का कार्य वर्ष 2003 से निरंतर करता चला आ रहा है। विगात वर्षों की भांति इस वर्ष भी कार्यक्रम में उपस्थित 75 व इससे अधिक आयुवर्ग के आर्यजनों को सम्मानित किया गया जिसमें इस वर्ष श्रीमती ललिता आर्या जी एवम् सुषमा गुलाटी को सम्मानित किया गया।
इसके उपरान्त आर्य समाज द गुरुकुल द्वारा आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों के बच्चों के लिए जो स्कूल चलाया जाता है, उसमें से नर्सरी से नौवीं कक्षा तक के बच्चों ने विभिन्न प्रतियोगिताओं में जो प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान प्राप्त किये, उन बच्चों को पुरस्कार देकर उन्हें प्रोत्साहित किया व स्कूल की सभी अधियापिकाओं को और अधयापकों भी उनके अछे कार्य करने पर सम्मानित किया गया पुरस्कार वितरण वहां विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित श्री रवीन्द्र तलवार जी एवं वैदिक विद्वान आदरणीय आचार्य श्री विरेन्द्र शास्त्री जी के कर कमलों के द्वारा किया गया।
कार्यक्रम के अपने अंतिम उद्बोधन में आचार्य श्री विरेन्द्र शास्त्री जी ने सभी को आर्यसमाज से जुड़कर ऋषि पथ पर चलने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि ऋषियों के बताए मार्ग पर चल कर ही इस समाज, राष्ट्र व विश्व का कल्याण हो सकता है क्योंकि ऋषियों का चिंतन सभी प्रकार के स्वार्थों से ऊपर उठकर, प्राणी मात्र के कल्याण के लिए हुआ करता है। उन्होंने यह भी बताया कि यह दुर्भाग्य है इस हिंदू जाति का कि इसका मार्गदर्शक स्वयं भटका हुआ है और वो अपने स्वार्थ के कारण से लोगों को ऋषियों के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देने की बजाय अपने पीछे चलने के लिए प्रेरित कर रहा है। कार्यक्रम के अंत में विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित श्री रवीन्द्र तलवार जी ने आर्यसमाज के सभी आयोजकों को इस प्रकार के कार्यक्रम प्रतिवर्ष आयोजित करने के लिए श्लाघा करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया। मंत्री योगिंदर क्वात्रा ने इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिये सभी सदस्यों का और कार्यकर्ताओं भी धन्यवाद किया।