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चंडीगढ़

चंडीगढ़ प्रशासन ने औद्योगिक डिकार्बोनाइजेशन एवं ऊर्जा दक्षता पर किया कार्यशाला का आयोजन

Updated on Thursday, September 04, 2025 17:04 PM IST



चंडीगढ़, ऊर्जा प्रबंधन प्रकोष्ठ (ईएमसी) / राज्य नामित एजेंसी (एसडीए), इंजीनियरिंग विभाग, यू.टी. चंडीगढ़ द्वारा “औद्योगिक डिकार्बोनाइजेशन एवं उद्योग व डिस्कॉम में ऊर्जा दक्षता” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री, सेक्टर-31, चंडीगढ़ में किया गया। कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए यू.टी. चंडीगढ़ के मुख्य अभियंता, ई. सी. बी. ओझा ने औद्योगिक क्षेत्र में डिकार्बोनाइजेशन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि उन्नत तकनीकों और ऊर्जा दक्ष प्रथाओं को अपनाना समय की मांग है। उन्होंने पुनः दोहराया कि चंडीगढ़ वर्ष 2030 तक कार्बन न्यूट्रल और वर्ष 2047 तक नेट-जीरो सिटी बनने के संकल्प की ओर अग्रसर है, जिसमें उद्योग क्षेत्र की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।

चंडीगढ़ प्रशासन ने औद्योगिक डिकार्बोनाइजेशन एवं ऊर्जा दक्षता पर किया कार्यशाला का आयोजन



इस अवसर पर श्री पवितर सिंह, पीसीएस, निदेशक उद्योग, चंडीगढ़ प्रशासन ने सतत औद्योगिक विकास की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उद्योगों को प्रतिस्पर्धी बने रहने के साथ-साथ राष्ट्रीय जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए स्वच्छ तकनीकों, ऊर्जा दक्ष उपकरणों एवं अक्षय ऊर्जा को अपनाना चाहिए। श्री अरुण कुमार वर्मा, निदेशक, चंडीगढ़ पावर डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (सीपीडीएल) ने औद्योगिक डिकार्बोनाइजेशन में ऊर्जा क्षेत्र की अहम भूमिका पर बल देते हुए कहा कि स्वच्छ एवं सतत प्रथाओं को अपनाने के लिए विश्वसनीय और आधुनिक ऊर्जा अवसंरचना आवश्यक है।

कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में औद्योगिक डिकार्बोनाइजेशन के मार्ग, भवनों में ऊर्जा दक्षता, एचवीएसी और लाइटिंग में लागत-बचत की संभावनाएँ, एमएसएमई डिकार्बोनाइजेशन की चुनौतियाँ, तथा कूलिंग टावर, मोटर एवं अन्य उपकरणों की दक्षता में वृद्धि जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। साथ ही, आईएसओ 50001 फ्रेमवर्क पर भी विचार-विमर्श किया गया, जिससे संरचित ऊर्जा प्रबंधन प्रणाली लागू करने के महत्व को रेखांकित किया गया।

कार्यशाला में 50 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें एमएसएमई, डिस्कॉम, सरकारी विभागों, तकनीकी विशेषज्ञों और अकादमिक जगत के प्रतिनिधि शामिल थे। प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से विचार-विमर्श एवं अनुभव साझा किए। कार्यक्रम का समापन उद्योगों से इस सामूहिक आह्वान के साथ हुआ कि वे सतत उत्पादन पद्धतियों को शीघ्र अपनाएँ, अक्षय ऊर्जा का उपयोग बढ़ाएँ और ऊर्जा दक्ष तकनीकों का एकीकरण करें। इस कार्यशाला ने औद्योगिक डिकार्बोनाइजेशन के क्षेत्र में नवाचार और सहयोग को बढ़ावा देने में चंडीगढ़ प्रशासन की नेतृत्वकारी भूमिका को पुनः स्थापित किया।
 
 
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